ग्वालियर शहर के झांसी रोड थाना क्षेत्र स्थित एजी ऑफिस के पास चल रहे दारुल कुरआन मदरसे पर प्रशासन और बाल संरक्षण आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार को मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा के नेतृत्व में एक संयुक्त टीम ने इस संस्थान का औचक निरीक्षण किया।

औपचारिक शिक्षा से दूर मिले बच्चे

निरीक्षण के दौरान मदरसे की कार्यप्रणाली और व्यवस्थाओं में भारी खामियां उजागर हुईं। जांच में पता चला कि यहां रह रहे बच्चे नियमित रूप से औपचारिक स्कूली शिक्षा से वंचित थे। आयोग की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मौके से 18 बालकों और 8 बालिकाओं समेत कुल 26 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया। इन सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति (CWC) के सुपुर्द कर दिया गया है।

पड़ोसी राज्य से भी लाए गए थे बच्चे

आयोग की शुरुआती जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि इस मदरसे में ग्वालियर-चंबल संभाग के विभिन्न जिलों के अलावा पड़ोसी राज्य राजस्थान से ताल्लुक रखने वाले बच्चे भी रह रहे थे। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार यहां 15 बच्चियों और 42 बालकों का पंजीयन दर्ज है, लेकिन धरातल पर नियमों की अनदेखी साफ तौर पर देखने को मिली।

मदरसा प्रबंधन और परिजनों ने जताया विरोध

इस अचानक की गई कार्रवाई से मदरसा प्रशासन में नाराजगी फैल गई है। संस्थान के शिक्षक मोहम्मद शकीर ने इस पूरी कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताते हुए कहा कि भवन का निर्माण कार्य अभी चल रहा है, जिसके कारण कुछ अस्थायी समस्याएं थीं जिन्हें ठीक किया जा रहा था। उन्होंने इसे एक खास उद्देश्य के तहत की गई कार्रवाई करार दिया।

दूसरी ओर, जब बच्चों के परिजनों को इस रेस्क्यू अभियान की सूचना मिली, तो वे भी भारी संख्या में मौके पर पहुंच गए। परिजनों ने प्रशासन के इस कदम का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें अपने बच्चों के खान-पान, रहने और दीनी तालीम के तरीकों से किसी भी प्रकार की कोई शिकायत नहीं थी।