मध्य प्रदेश के कृषि क्षेत्र को पूरी तरह से आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय (RVSKVV) ने एक अहम पहल की है। विश्वविद्यालय ने डिजिटल और रोबोटिक फार्मिंग प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने के लिए राज्य शासन को 139 करोड़ रुपए का विस्तृत प्रस्ताव भेजा है। इस प्रोजेक्ट के स्वीकृत होने के बाद प्रदेश की किसानी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ड्रोन, रोबोटिक्स और सेंसर आधारित तकनीक का दायरा काफी बढ़ जाएगा।
कैंपस में बनेगी विशेष एआई एग्रीकल्चर लैब
शासन से हरी झंडी मिलने के बाद विश्वविद्यालय परिसर के भीतर एक अत्याधुनिक एआई एग्रीकल्चर लैब की स्थापना की जाएगी। इस लैब के जरिए कृषि छात्रों, शोधार्थियों के अलावा सीधे तौर पर किसानों को भी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा खेतों में ड्रोन तकनीक, कृषि रोबोट और ऑटोमेटेड सिंचाई प्रणालियों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे समय और पानी की बचत हो सके।
प्रिसिजन फार्मिंग की अवधारणा के तहत अत्याधुनिक सेंसरों की मदद से मिट्टी की नमी, उसमें मौजूद पोषक तत्वों और फसल की सेहत का सटीक डेटा जुटाया जाएगा। इस डेटा के विश्लेषण से किसानों को खाद, पानी और बीज के इस्तेमाल से जुड़े फैसले बहुत ही सटीकता के साथ लेने में मदद मिलेगी।
IIT रोपड़ के साथ हुआ एमओयू, 26 जिलों में लगेंगे वेदर स्टेशन
विश्वविद्यालय के शिक्षण निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार ने जानकारी दी है कि RVSKVV ने आईआईटी रोपड़ के एएनएएम (ANAM) एआई सेंटर के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। शिक्षा मंत्रालय से वित्तपोषित इस केंद्र के सहयोग से खेती-किसानी की स्थानीय जरूरतों के मुताबिक विशेष एआई टूल्स तैयार और कस्टमाइज किए जा रहे हैं।
इस महत्वकांक्षी योजना के अंतर्गत मुख्य रूप से मालवा और चंबल संभाग के कुल 26 जिलों में एआई व सेंसर आधारित स्मार्ट वेदर स्टेशन स्थापित किए जाने की योजना है। विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य है कि इन वेदर स्टेशनों की स्थापना आगामी तीन महीनों के भीतर पूरी कर ली जाए।
मोबाइल ऐप के जरिए 25 किलोमीटर के दायरे की मिलेगी जानकारी
प्रस्तावित ये स्मार्ट वेदर स्टेशन लगभग 7 से 8 फीट ऊंचे होंगे, जिनमें लगे सेंसर करीब 25 किलोमीटर के दायरे में मौसम और मिट्टी से जुड़ा पल-पल का डेटा रिकॉर्ड करेंगे। इस एकत्रित डेटा को एयरटेल और बीएसएनएल के नेटवर्क के माध्यम से सर्वर तक भेजा जाएगा, जिसे किसान मोबाइल ऐप और एएनएएम एआई पोर्टल पर अपनी लॉगिन आईडी के जरिए आसानी से देख सकेंगे।
इस पूरी डिजिटल प्रक्रिया में किसानों को भी सक्रिय रूप से शामिल किया जाएगा। जिस भी किसान के खेत में यह वेदर स्टेशन लगाया जाएगा, उसे एक विशिष्ट लॉगिन आईडी प्रदान की जाएगी। इसके जरिए किसान अपने खेत की वास्तविक तस्वीरें और जमीनी स्थिति सीधे एप पर अपलोड कर सकेंगे।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!