मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने 13 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता के स्वास्थ्य और भविष्य को सर्वोपरि मानते हुए 28 सप्ताह और 2 दिन के गर्भ को समाप्त करने की अहम अनुमति प्रदान की है।
अदालत के निर्देश पर तय हुई मेडिकल प्रक्रिया
न्यायालय की एकलपीठ के जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने विदिशा स्थित अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में वरिष्ठ विशेषज्ञों की निगरानी में यह प्रोसीजर संपन्न कराने के आदेश दिए हैं। तयशुदा निर्देशों के अनुसार बुधवार, 30 सितंबर को दोपहर 2 बजे यह चिकित्सकीय प्रक्रिया की जाएगी।
वैधानिक सीमा पार होने के कारण पहुंचा था मामला
विदिशा की बाल कल्याण समिति (CWC) की रिपोर्ट के अनुसार, 13 वर्ष 2 माह की इस नाबालिग के साथ वर्ष की शुरुआत में दुष्कर्म हुआ था। गर्भ का समय पर पता न चल पाने के कारण जब जांच कराई गई, तब तक गर्भ की अवधि 28 सप्ताह से अधिक हो चुकी थी। कानूनन 24 सप्ताह से ज्यादा का गर्भ होने के कारण मामला अनुमति के लिए हाईकोर्ट पहुंचा।
हाईकोर्ट के आदेश पर 28 सितंबर को एक मेडिकल बोर्ड का गठन कर पीड़िता की जांच कराई गई थी। बोर्ड की रिपोर्ट में सामने आया कि पीड़िता मामूली आयरन-डेफिशिएंसी एनीमिया से ग्रसित है, लेकिन इस प्रक्रिया के लिहाज से पूरी तरह फिट है।
विशेषज्ञों की देखरेख और पुख्ता इंतजाम
मेडिकल कॉलेज के डीन और अधीक्षक को स्त्री रोग, एनेस्थीसिया, मेडिसिन और बाल रोग विशेषज्ञों की एक वरिष्ठ टीम गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रक्रिया के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए ब्लड बैंक, आईसीयू और नवजात शिशु देखभाल की पुख्ता व्यवस्था रखने को कहा गया है।
अदालत ने यह भी निर्देश दिए हैं कि प्रक्रिया के दौरान मिलने वाले डीएनए सैंपल को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए ताकि कानूनी कार्रवाई और ट्रायल में उसका उपयोग हो सके। साथ ही, पीड़िता की पहचान की गोपनीयता और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के लिए विदिशा के एसपी और थाना प्रभारी को निर्देशित किया गया है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!