ग्वालियर-चंबल संभाग के सबसे बड़े एक हजार बिस्तर के अस्पताल में इलाज में देरी और लापरवाही के कारण एक साठ वर्षीय बुजुर्ग की जान चली गई। मृतक की पहचान दतिया जिले के ऊंचिया गांव निवासी रतिराम के रूप में हुई है, जो पिछले डेढ़ महीने से गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे।

दतिया और झांसी के बाद ग्वालियर पहुंचे थे परिजन

प्राप्त जानकारी के अनुसार रतिराम को लंबे समय से तेज बुखार की शिकायत थी और स्थानीय चिकित्सकों ने उनमें खून की कमी बताई थी। उनकी पत्नी रामप्यारी उन्हें पहले दतिया मेडिकल कॉलेज और बाद में झांसी के सरकारी अस्पतालों में ले गई थीं, परंतु स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ।

इसके बाद परिजनों की सलाह पर रामप्यारी अपने पति को बस के जरिए ग्वालियर लेकर पहुंचीं। बुधवार की सुबह करीब दस बजे वे एक हजार बिस्तर अस्पताल पहुंचे, जहां कतार में लगकर पर्चा बनवाया गया और डॉक्टरों द्वारा लिखी गई शुरुआती जांचें भी पूरी करवा ली गईं।

फर्श पर तड़पते रहे मरीज, नहीं मिला किसी डॉक्टर का सहारा

पत्नी रामप्यारी का आरोप है कि पर्चा बनने और जांचें होने के बावजूद किसी भी डॉक्टर ने उनके पति को नहीं देखा और न ही वार्ड में भर्ती किया गया। दोपहर के वक्त अचानक बुखार और पीड़ा बढ़ने पर रतिराम बेंच से नीचे फर्श पर गिर पड़े और दर्द से कराहते रहे।

इस दौरान रामप्यारी अस्पताल के स्टाफ और डॉक्टरों के सामने हाथ जोड़कर इलाज की गुहार लगाती रहीं, लेकिन किसी ने उनकी गुहार नहीं सुनी। मदद के लिए आगे आए कुछ अन्य लोगों ने जब गार्ड्स से स्ट्रेचर मांगा, तो उन्हें डॉक्टरों के हड़ताल पर होने की बात कहकर टाल दिया गया।

चार घंटे तक तड़पने के बाद तोड़ा दम

अस्पताल पहुंचने के करीब चार घंटे तक फर्श पर अछूते पड़े रहने के बाद रतिराम ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। बुजुर्ग की सांसें थमने के ठीक बाद अस्पताल का अमला हरकत में आया और फौरन स्ट्रेचर मंगाकर शव को आईसीयू पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस दुखद घटना के बाद गरीब पत्नी रामप्यारी का रो-रोकर बुरा हाल है और उनके पास अपने पति के शव को वापस घर ले जाने के लिए एंबुलेंस का किराया तक नहीं था। उल्लेखनीय है कि यह पूरी घटना ऐसे समय में घटी जब अस्पताल के डॉक्टर विभिन्न मांगों और विरोध प्रदर्शनों के चलते हड़ताल पर थे।