मध्य प्रदेश में बांग्लादेश के नागरिकों को कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट उपलब्ध कराने वाले संगठित गिरोह की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। राज्य के स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) द्वारा की गई कार्रवाई के तहत अब तक एक सौ से अधिक संदिग्धों की पहचान कर ली गई है, हालांकि अभी तक इस मामले में सिर्फ सात आरोपियों को ही गिरफ्तार किया जा सका है।

सवा महीने की जांच और विदेश यात्राओं का खुलासा

करीब सवा महीने तक चली इस जांच के दौरान यह बात भी उजागर हुई है कि मध्य प्रदेश के भीतर तैयार किए गए करीब सवा सौ संदिग्ध पासपोर्ट के माध्यम से 120 से अधिक बार विदेशी यात्राएं की गईं। अब जांच एजेंसी यह पड़ताल करने में जुटी है कि इन पासपोर्ट का उपयोग करके विदेश जाने वाले लोगों में से कितने संदिग्ध अभी तक देश वापस नहीं लौटे हैं।

जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि इन पासपोर्ट को बनवाने के लिए फर्जी पते, झूठी पहचान और जाली सत्यापन पत्रों का इस्तेमाल किया गया। खास बात यह है कि इन संदिग्ध पासपोर्ट पर डबरा, भोपाल और बैतूल स्थित बौद्ध मठों व विहारों के पते दर्ज होने की जानकारी मिली है, जिससे इस नेटवर्क की पहुंच का दायरा और बढ़ गया है।

पुलिस और प्रशासनिक अमला भी जांच के घेरे में

इस प्रकरण की जांच का दायरा केवल एजेंटों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुलिस सत्यापन, पासपोर्ट शाखा और दस्तावेज जारी करने वाले संबंधित कर्मचारियों व अधिकारियों तक पहुंच गया है। एसटीएफ द्वारा चिह्नित किए गए एक सौ से ज्यादा लोगों में वे लोग भी शामिल हैं जो थानों में पुलिस सत्यापन या पासपोर्ट शाखा की प्रक्रिया से जुड़े रहे हैं।

इसके अतिरिक्त, फर्जी दस्तावेजों में गवाह बनने वाले तथा बांग्लादेशी नागरिकों को मठों में शरण देने या उनके कागजातों का सत्यापन करवाने में संदिग्ध भूमिका निभाने वाले व्यक्तियों की भी सघन पड़ताल की जा रही है। एजेंसी इस बात की कड़ियां जोड़ रही है कि फर्जी कागजात तैयार होने से लेकर पासपोर्ट बनने तक किस स्तर पर किसकी संलिप्तता रही है।

भारतीय पासपोर्ट की वैश्विक पहुंच का उठाया गया फायदा

एजेंसी की पूछताछ में इस बात के संकेत मिले हैं कि इस गिरोह ने भारतीय पासपोर्ट की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और कई देशों में मिलने वाली आसान प्रवेश सुविधा का लाभ उठाने के लिए यह पूरा षड्यंत्र रचा था। पूछताछ के दौरान रियाल चौधरी के संदर्भ में यह बात सामने आई कि भारतीय पासपोर्ट की मजबूत रैंकिंग के चलते इसकी मांग अधिक थी।

फरवरी 2026 के हेनले पासपोर्ट इंडेक्स के अनुसार भारतीय पासपोर्ट को 75वां स्थान प्राप्त है। इसके तहत भारतीय पासपोर्ट धारकों को दुनिया के 56 देशों में बिना पहले से वीजा लिए या 'वीजा ऑन अराइवल' जैसी सहूलियतें मिलती हैं, हालांकि इन सुविधाओं के नियम संबंधित देशों की नीतियों के आधार पर तय होते हैं।