ग्वालियर शहर के मुरार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भगत सिंह मार्केट स्थित संभाजी राव का बंगला परिसर में लगभग 10 हजार वर्गफीट की बहुमूल्य संपत्ति को जालसाजी के माध्यम से अपने नाम कराने का बड़ा मामला प्रकाश में आया है।

बैकडेटेड वसीयत तैयार कर रची गई साजिश

इस धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए 17 फरवरी 2017 की बैकडेटेड फर्जी वसीयत बनाई गई थी। महाराष्ट्र के पुणे जिले के तानावडी निवासी मृतका के भाई की तरफ से दी गई शिकायत और प्रारंभिक पुलिस जांच के बाद मुरार थाने में मुख्य आरोपियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

देखरेख के लिए रखे गए कर्मचारियों पर ही उठे सवाल

शिकायतकर्ता राजेंद्र कुमार उर्फ विजय कुमार भोंसले ने पुलिस को बताया कि उनकी अविवाहित बहन तारा भोंसले का निधन 18 जनवरी 2018 को हो गया था। बहन के देहांत के पश्चात उस property की देखरेख के वास्ते जितेंद्र शर्मा को काम पर रखा गया था। समय बीतने के साथ नीयत में खोट आने पर जितेंद्र शर्मा, उसकी पत्नी सुनीता शर्मा तथा घरेलू सहायिका अंजली भोंसले ने मिलकर साजिश रची और एक फर्जी वसीयत तैयार कर ली।

नामांतरण के आवेदन से उजागर हुआ पूरा फर्जीवाड़ा

पूरे षड्यंत्र का खुलासा तब हुआ जब आरोपी जितेंद्र शर्मा ने नगर निगम कार्यालय में उसी फर्जी वसीयत को आधार बनाकर संपत्ति के म्यूटेशन यानी नामांतरण के लिए फाइल लगा दी। पुलिस तफ्तीश में यह भी सामने आया कि उक्त वसीयत की प्रमाणित कॉपी घटना के करीब छह साल बाद 4 मार्च 2024 को सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से निकाली गई थी। साथ ही, संबंधित नोटरी रजिस्टर का मूल दस्तावेज भी जांच एजेंसी को नहीं सौंपा जा सका।

इस पूरी साजिश का एक और दिलचस्प पहलू यह रहा कि उस कथित वसीयत में गवाह के रूप में आरोपी जितेंद्र की पत्नी सुनीता शर्मा और नौकरानी अंजली भोंसले के ही हस्ताक्षर थे। तारा भोंसले के इंतकाल के लगभग सात साल बाद अचानक शुरू हुई नामांतरण प्रक्रिया से इस कागजात की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

मुरार थाना प्रभारी मैना पटेल ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रार्थी की लिखित शिकायत और शुरुआती जांच के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया गया है। पुलिस अब वसीयत के दस्तावेजों की सत्यता और अन्य बिंदुओं की बारीकी से जांच कर रही है, जिसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया को बढ़ाया जाएगा।