ग्वालियर जिले के मुरार ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले सिरसौद गांव में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां रविवार की शाम को 10 बच्चों की सेहत रतनजोत का जहरीला फल खाने के बाद अचानक से काफी ज्यादा बिगड़ गई।

भंडारे से लौटते वक्त खेत के किनारे मिला था पौधा

ये सभी बच्चे क्षेत्र में आयोजित भागवत कथा के भंडारे में शामिल होने के बाद अपने घरों की तरफ लौट रहे थे। रास्ते में खेत के पास खड़े रतनजोत के पौधे को देखकर बच्चों को लगा कि यह कोई सूखा मेवा यानी ड्राईफ्रूट है। नासमझी में उन्होंने इस जहरीले फल को तोड़कर आपस में बांट लिया और सेवन कर लिया।

घर पहुंचने के कुछ ही समय बाद बच्चों के पेट में तेज दर्द शुरू हो गया और उन्हें लगातार उल्टी तथा दस्त की शिकायत होने लगी, जिससे परिजनों में हड़कंप मच गया।

अस्पताल में बच्चों की गंभीर हालत, आईसीयू में इलाज जारी

घबराए हुए परिजन सभी बच्चों को तत्काल मुरार जिला अस्पताल ले गए, जहां से उन्हें बेहतर इलाज के लिए जयारोग्य अस्पताल समूह के कमला राजा अस्पताल रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के मुताबिक कुल 10 बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है।

कमला राजा अस्पताल के पीआईसीयू में पूजा, आरती, दीक्षा, प्रवीण, दिव्या, सुमित, गौरव और तनु का इलाज चल रहा है। वहीं हरिओम और सेजल की स्थिति ज्यादा नाजुक होने के कारण उन्हें न्यू जेएएच के आईसीयू में रखा गया है।

विशेषज्ञों ने की बच्चों को अनजान फलों से दूर रखने की अपील

मामला संज्ञान में आते ही वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ प्रो. डॉ. घनश्याम दास कमला राजा अस्पताल पहुंचे और उन्होंने स्वयं बच्चों की चिकित्सकीय स्थिति का जायजा लेते हुए डॉक्टरों की टीम को जरूरी निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि रतनजोत का फल जहरीला होता है जिसके सेवन से शरीर में विषाक्तता फैल जाती है और गंभीर डिहाइड्रेशन की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

दूसरी ओर, परिजनों ने मुरार जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आपातकाल में बिना प्राथमिक उपचार दिए ही सभी को फौरन रेफर कर दिया गया। बहरहाल, डॉक्टरों ने पालकों और ग्रामीणों को सलाह दी है कि बच्चों को किसी भी अनजान पेड़ के फल या बीज खाने से सख्त तौर पर मना करें।