गुना जिले में अब पुलिस बल की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से डिजिटल और आधुनिक बना दिया गया है। पुलिसकर्मियों की हाजिरी और ड्यूटी अब पारंपरिक तरीकों की बजाय एक विशेष मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रबंधित की जाएगी। इस पूरी व्यवस्था को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जोड़ा गया है, जिससे जवानों की तैनाती और उपस्थिति का सटीक रिकॉर्ड रखा जा सकेगा।

ग्वालियर रेंज डीआईजी का दो दिवसीय दौरा

इस नई व्यवस्था की शुरुआत करने के लिए ग्वालियर रेंज के डीआईजी डॉ. असित यादव दो दिवसीय दौरे पर गुना पहुंचे थे। अपने दौरे के पहले दिन उन्होंने कैंट थाने का औचक निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पुलिस स्टाफ से बातचीत कर पूर्व में किए गए उत्कृष्ट कार्यों और आपराधिक मामलों के निपटारे के संबंध में भी जानकारी जुटाई।

दौरे के दूसरे दिन मंगलवार को डीआईजी परेड ग्राउंड पहुंचे, जहां उन्होंने परेड का मुआयना करने के साथ ही पुलिस जिम और मेस की व्यवस्थाओं को भी परखा। इसके बाद आयोजित सैनिक सम्मेलन में एसपी हितिका वासल और एएसपी प्रशांत सिंह सुमन ने उनका स्वागत किया।

आईआईटी छात्र द्वारा तैयार किया गया है ऐप

सैनिक सम्मेलन के दौरान ही डीआईजी डॉ. असित यादव ने इस नवाचारी ऐप का औपचारिक लोकार्पण किया। इस ऐप को तैयार करने वाले आईआईटी के छात्र निखिल ने कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और जवानों को इसके संचालन की पूरी प्रक्रिया समझाई।

निखिल ने जानकारी दी कि यह सिस्टम पूर्व निर्धारित प्रोग्रामिंग के आधार पर यह तय करेगा कि किस क्षेत्र में किस रैंक के कितने पुलिसकर्मियों की आवश्यकता है। इसके माध्यम से जवानों को उनकी ड्यूटी का चार्ट एक दिन पहले ही उनके मोबाइल पर प्राप्त हो जाएगा। साथ ही, ऐप यह भी सुनिश्चित करेगा कि पुलिसकर्मी तय समय पर अपनी ड्यूटी स्थल पर पहुंचे हैं या नहीं।

दक्षता के आधार पर मिलेंगे अंक

इस तकनीकी व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि इसमें एक पॉइंट सिस्टम भी जोड़ा गया है। पुलिसकर्मियों के कार्य प्रदर्शन और उनकी दक्षता के आधार पर उन्हें अंक दिए जाएंगे। हर महीने के अंत में इन्हीं अंकों की गणना के आधार पर सर्वश्रेष्ठ पुलिस अधिकारी का चयन किया जाएगा।

प्रस्तुति के दौरान यह भी बताया गया कि इस पूरे सिस्टम को कुल तीन चरणों में विकसित किया जा रहा है। प्रथम चरण में ई-प्रबंध पोर्टल, दूसरे चरण में सुरक्षा कवच और तीसरे चरण में क्वार्टर मैनेजमेंट सिस्टम को शामिल किया गया है।

ऐप के लोकार्पण के बाद आयोजित सैनिक दरबार में डीआईजी ने मैदानी अमले से सीधा संवाद किया। उन्होंने पुलिसकर्मियों की मैदानी समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके समाधान के संबंध में उचित दिशा-निर्देश भी दिए।