गुना जिले के उत्तर वन परिक्षेत्र अंतर्गत भादौरा सब रेंज के आगरा-हंसली के जंगलों में कुछ दिन पहले एक तेंदुए का शव मिलने के मामले में वन विभाग ने बड़ा खुलासा किया है। इस मामले में संलिप्त चार आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से तेंदुए के अवशेष बरामद किए गए हैं।
क्षत-विक्षत हालत में मिला था शव
ग्रामीणों द्वारा जंगल में तेंदुए का शव पड़े होने की सूचना वन विभाग को दी गई थी। मौके पर पहुंची टीम ने देखा कि तेंदुए का शव बेहद खराब हालत में था। उसका सिर और चारों पैर गायब थे, और धड़ की खाल भी उतारी जा चुकी थी। ऐसी भयानक स्थिति देखकर ही वन्यजीव तस्करों द्वारा शिकार किए जाने की आशंका मजबूत हो गई थी।
डॉग स्क्वॉड और तकनीकी साक्ष्यों से हुई धरपकड़
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में जांच शुरू की गई। घटनास्थल पर डॉग स्क्वॉड की मदद ली गई और मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया गया। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए अवैध शिकार में शामिल चार संदिग्धों की पहचान कर ली गई।
वन विभाग की टीम ने दबिश देकर आरोपी खुमानसिंह पुत्र रावला बारेला, रमेश उर्फ पप्पू पुत्र करणसिंह बारेला, लखन पुत्र गणपत बारेला और डूमसिंह पुत्र काशीराम बारेला (सभी निवासी ग्राम हांसली) को धर दबोचा। आरोपियों के पास से तीन कट्टों में छिपाकर रखे गए तेंदुए के धड़ के हिस्से, पैर और खाल बरामद की गई है।
दवाइयों के लिए शिकार करने का दावा
पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ के दौरान चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने तेंदुए का शिकार दवाइयां बनाने के लिए किया था। फिलहाल वन अमला यह भी तस्दीक कर रहा है कि इस वारदात के पीछे किसी बड़े वन्यजीव तस्कर गिरोह का हाथ तो नहीं है।
इस पूरी कार्रवाई में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जबकि मामले के अन्य पहलुओं की भी गहराई से छानबीन जारी है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!