देश के विभिन्न राज्यों की पुलिस अक्सर आपराधिक वारदातों के बाद पारदी बस्तियों में दबिश देने जाती थी, लेकिन सही ठिकानों की जानकारी न होने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता था। इस समस्या से निपटने के लिए गुना जिले की पुलिस ने एक अभिनव प्रयोग किया है, जिससे अपराधियों की धरपकड़ अब बेहद आसान हो जाएगी।

579 बदमाशों के घरों की हुई जियो-टैगिंग

स्थानीय पुलिस प्रशासन ने चार प्रमुख पारदी बहुल गांवों के कुल 579 वारंटी बदमाशों के घरों को अपने डिजिटल नक्शे पर पूरी तरह से उतार लिया है। इसके लिए पुलिसकर्मियों ने व्यक्तिगत रूप से घर-घर जाकर जियो-टैगिंग की प्रक्रिया पूरी की, मुखबिर तंत्र से पते जुटाए और मौके पर जाकर उनकी सत्यता की जांच भी की।

इस पूरी प्रक्रिया के बाद एक विस्तृत आपराधिक डेटाबेस और डिजिटल कुंडली तैयार की गई है। पुलिस अधीक्षक हितिका वासल ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि एक तरफ जहां इन बदमाशों की संपूर्ण प्रोफाइल तैयार की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ 'नई दिशा' अभियान के माध्यम से इन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास भी लगातार जारी हैं।

अपराध छोड़ने वालों के लिए 'नई दिशा' अभियान

प्रशासनिक कार्रवाई केवल सख्ती तक ही सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि सकारात्मक बदलाव के लिए भी कदम उठाए गए हैं। 'नई दिशा' अभियान के अंतर्गत पारदी समाज के उन लोगों को विशेष रूप से चिन्हित किया जा रहा है जो अपराध का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन व्यतीत करना चाहते हैं। ऐसे परिवारों और युवाओं को स्वरोजगार के अवसर और उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा से जोड़ने की पहल शुरू की गई है।

जीपीएस नेविगेशन से सीधे दरवाजे तक पहुंचेगी पुलिस

एक विशेष टीम ने कनेरा चक, खेजरा चक, बीलाखेड़ी और कनेरी गांवों में चिन्हित 579 वारंटियों के घरों के अक्षांश और देशांतर यानी लैटीट्यूड-लॉन्गीट्यूड को रिकॉर्ड करके जियो-टैगिंग की है। इस तकनीकी व्यवस्था के बाद अब अन्य जिलों या दूसरे राज्यों की पुलिस को इन गांवों की गलियों में रास्ता भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

अब पुलिसकर्मी सीधे जीपीएस नेविगेशन की मदद से सटीक लोकेशन पर दबिश दे सकेंगे। इस व्यवस्था के लागू होने से उन चुनिंदा स्थानीय कर्मियों पर भी निर्भरता समाप्त हो गई है जो खुद को पारदी मामलों का विशेषज्ञ बताते थे और पूर्व में सूचनाएं लीक होने की शिकायतें सामने आती थीं।