जिले के फतेहगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले धनोरिया गांव में पप्पू धाकड़ की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब अदालत तक पहुंच गया है। पीड़ित परिवार ने इस संबंध में कोर्ट में परिवाद दायर कर स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
एक बीघा जमीन और बाड़े को लेकर था पुराना विवाद
अदालत में दिए गए परिवाद के मुताबिक मृतक पप्पू और आरोपी पक्ष के बीच लगभग एक बीघा कृषि भूमि के साथ ही एक बाड़े को लेकर रंजिश चली आ रही थी। गत 24 अगस्त की सुबह करीब 8 से 9 बजे के बीच रामस्वरूप उर्फ माटसाहब और उसके बेटे राजकुमार ने कथित तौर पर पप्पू के साथ विवाद किया। आरोप है कि दोनों ने पहले गाली-गलौज की और फिर उसके साथ मारपीट करते हुए उसे चबूतरे से नीचे पत्थर पर गिरा दिया।
परिवार का यह भी आरोप है कि मारपीट के दौरान एक आरोपी ने मृतक की गर्दन और पीठ के हिस्से पर पैर रखकर दबाव बनाया, जबकि दूसरे आरोपी ने उसके दोनों हाथ मजबूती से पकड़ रखे थे जिससे वह बचाव नहीं कर सका।
अस्पताल में डॉक्टरों ने घोषित किया था मृत
घटना के तुरंत बाद गंभीर हालत में पप्पू को उपचार के लिए कैलवाड़ा अस्पताल पहुंचाया गया था, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इस पूरी घटना की चश्मदीद मृतक की पत्नी, उसकी बेटियां और एक अन्य महिला को बताया गया है, जिन्होंने आरोपियों की करतूत को अपनी आंखों से देखने का दावा किया है।
परिजन का मुख्य आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में हत्या का केस दर्ज करने से गुरेज किया। उनका कहना है कि मर्ग और देहाती नालसी जैसी प्राथमिक प्रक्रियाओं में भी घटना से जुड़े वास्तविक तथ्यों को जानबूझकर छिपाया गया और सही तरीके से दर्ज नहीं किया गया।
उच्च अधिकारियों को आवेदन देने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
न्याय पाने के लिए पीड़ित परिवार ने गत 31 अगस्त, 8 सितंबर और 22 सितंबर को जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित आवेदन सौंपे थे। इन सभी पत्रों में निष्पक्ष जांच कराते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई थी, लेकिन परिजनों का कहना है कि तमाम गुहार के बावजूद अब तक पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
इसके अतिरिक्त, परिवाद में यह भी सनसनीखेज आरोप लगाया गया है कि आरोपी पक्ष के रिश्तेदारों की ओर से उन्हें मामले को रफा-दफा करने के एवज में 5 लाख रुपये का लालच दिया गया और कार्रवाई न करने की धमकी भी दी गई।
अब पीड़ित परिवार ने न्यायालय से गुहार लगाई है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 सहित अन्य सुसंगत धाराओं के तहत आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए और उन्हें नियमानुसार उचित क्षतिपूर्ति दिलाई जाए।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!