ग्वालियर-चंबल संभाग के गुना शहर में फर्जीवाड़े का एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां एक युवक खुद को शिक्षा विभाग का बड़ा अधिकारी बताकर शहर के निजी स्कूलों में निरीक्षण करने पहुंच जाता था और स्कूल प्रबंधन को अपनी धौंस दिखाता था। पुलिस ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए आरोपी युवक को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है।

31 अगस्त को स्नेहलता पब्लिक स्कूल पहुंचा था आरोपी

यह पूरी घटना गुना शहर के बूढ़े बालाजी क्षेत्र स्थित स्नेहलता पब्लिक स्कूल की है। गत 31 अगस्त को अमित रजक नाम का एक युवक इस स्कूल में पहुंचा और उसने खुद को शिक्षा विभाग का उपसंचालक बताया। इसके बाद उसने स्कूल की कक्षाओं और व्यवस्थाओं का मुआयना करना शुरू कर दिया। इस दौरान उसने स्कूल प्रबंधन पर रौब झाड़ते हुए मान्यता समाप्त कराने तक की धमकी दी थी।

स्कूल प्रबंधन को जब युवक की हरकतों और उसके रुतबे पर संदेह हुआ, तो उन्होंने उसकी पुरानी गतिविधियों की पड़ताल की। सामने आया कि जुलाई महीने में भी इसी युवक ने स्कूल को फोन किया था और एक छात्रा की ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) बिना बकाया फीस चुकाए जारी करने का दबाव बनाया था। जब स्कूल प्रबंधन ने उसकी बात नहीं मानी, तब भी उसने मान्यता रद्द करने की बात कहकर डराने का प्रयास किया था।

सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया से खुला फर्ज़ीवाड़ा

स्कूल परिसर में हुई यह पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई थी। इसके बाद स्कूल संचालक ने मामले की गंभीरता को समझते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) और सिटी कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने शिकंजा कसा।

जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी मिली। मूल रूप से आरोन के रहने वाले अमित रजक ने अपने सोशल मीडिया बायो में खुद को सरकारी कर्मचारी और गुना के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जुड़ा होना बताया था। इसके अलावा उसने खुद को यूपीएससी का अभ्यर्थी भी लिख रखा था। उसके अकाउंट पर ऐसे कई फोटोग्राफ्स मिले, जिनमें वह गले में 'मप्र शासन' लिखा हुआ आईडी होल्डर लटकाए हुए नजर आ रहा है।

फर्जी आईडी कार्ड बनाकर चला रहा था रौब

आरोपी के पास से एक पहचान पत्र भी बरामद हुआ है, जिसके ऊपर 'मध्यप्रदेश शासन' और नीचे 'डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिस, गुना' मुद्रित है। इस कार्ड में उसका नाम अमित रजक और पद का नाम 'डिप्टी एजुकेशन ऑफिसर' लिखा हुआ है। हालांकि, शिक्षा विभाग के प्रशासनिक अमले में इस नाम का कोई पद अस्तित्व में ही नहीं है, जिससे यह साफ हो गया कि पूरा आईडी कार्ड और उसका रुतबा पूरी तरह फर्जी था।

अपनी इस फर्जी गतिविधियों का प्रचार करने के लिए आरोपी स्कूलों के निरीक्षण के दौरान खींचे गए फोटो अपने सोशल मीडिया स्टेटस पर अपलोड करता था। स्नेहलता पब्लिक स्कूल में निरीक्षण के बाद भी उसने वहां के फोटो स्टेटस पर लगाए थे और खुद को उप जिला शिक्षा अधिकारी बताते हुए शैक्षणिक गतिविधियों व व्यवस्थाओं का जायजा लेने की बात लिखी थी। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने और कितने स्कूलों को अपना निशाना बनाया है।