अशोकनगर जिले के भैंसरवास गांव से एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहां अंधविश्वास के चलते एक किसान को अपनी जान गंवानी पड़ी। खेत में काम करते समय सांप के काटने के बाद परिजनों ने उसे अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने में महत्वपूर्ण समय बर्बाद कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप किसान की मृत्यु हो गई।

घटना का विस्तृत विवरण

जानकारी के अनुसार, भैंसरवास निवासी 50 वर्षीय किसान चिरोंजीलाल कुशवाह 9 जुलाई की दोपहर लगभग 3 बजे अपने खेत में फसल देखने गए थे। इसी दौरान खेत में छिपे एक जहरीले सांप ने उनके पैर में डस लिया। सर्पदंश के तुरंत बाद चिरोंजीलाल की तबीयत बिगड़ने लगी और उन्होंने तत्काल अपने परिवार को इसकी सूचना दी।

सांप के काटने की खबर मिलते ही परिवार के सदस्य घबरा गए, लेकिन उन्होंने आधुनिक चिकित्सा का सहारा लेने के बजाय अंधविश्वास का रास्ता चुना। वे चिरोंजीलाल को लेकर अशोकनगर और पड़ोसी गुना जिले के बोरखेड़ा सहित दो अलग-अलग स्थानों पर झाड़-फूंक कराने के लिए भटकते रहे।

अंधविश्वास और देरी का घातक परिणाम

इस अंधविश्वास के चक्कर में लगभग 5 से 6 घंटे का बहुमूल्य समय बर्बाद हो गया। इस दौरान सांप का जहर चिरोंजीलाल के पूरे शरीर में तेजी से फैल गया, जिससे उनकी हालत गंभीर होती चली गई। जब स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई, तब जाकर देर रात परिजन उन्हें गुना जिला अस्पताल लेकर पहुंचे।

गुना जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने किसान को तुरंत भर्ती कर उपचार शुरू किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जहर पूरे शरीर में फैल चुका था और डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद चिरोंजीलाल को बचाया नहीं जा सका। आखिरकार, शुक्रवार की सुबह करीब 9 बजे उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

दो साल पहले भी हुआ था ऐसा ही हादसा

ग्रामीणों ने बताया कि चिरोंजीलाल के साथ यह दूसरा ऐसा हादसा था। ठीक दो साल पहले भी उन्हें इसी खेत में सांप ने डसा था। उस समय उन्हें समय पर सही इलाज मिल गया था या शायद जहर का प्रभाव कम था, जिसके कारण उनकी जान बच गई थी। लेकिन इस बार अंधविश्वास और इलाज में हुई देरी उनकी मौत का कारण बन गई।

अस्पताल प्रबंधन की सूचना पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। शुक्रवार को जिला अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम कराया गया और उसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। इस दुखद घटना के बाद से पूरे गांव में शोक का माहौल है।