स्थानीय स्तर पर आयोजित होने वाले सात दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत आगामी 14 सितंबर से होने जा रही है। इस धार्मिक आयोजन से ठीक पहले शनिवार की रात शहर में उत्साह का माहौल देखने को मिला, जब 'गुना के राजा' के रूप में पूजे जाने वाले भगवान गणेश की प्रतिमा को एक विशाल चल समारोह के साथ उनके निर्धारित झांकी स्थल तक पहुंचाया गया।
इंदौर के कलाकारों ने ढोल-ताशों से जमाया रंग
शनिवार की रात लगभग 8 बजे यह भव्य जुलूस कैंट क्षेत्र से आरंभ हुआ। चल समारोह के सबसे आगे इंदौर से आए प्रसिद्ध हनुमंत ध्वज पथक के करीब 50 कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे थे। इनके द्वारा बजाए जा रहे ढोल-ताशों की गूंज के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा आगे बढ़ रही थी, जिसे देखने के लिए मार्ग में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
सड़कों से लेकर छतों तक जुटी भारी भीड़
यह जुलूस कैंट से चलकर स्टेशन रोड और बोहरा मस्जिद के सामने स्थित पंडाल तक पहुंचा। स्टेशन रोड से लेकर जयस्तंभ चौराहे तक सड़क के दोनों किनारों पर स्थानीय नागरिकों का तांता लगा हुआ था। कई लोग इस धार्मिक यात्रा को निहारने के लिए आसपास की इमारतों और मकानों की छतों पर भी खड़े दिखाई दिए।
चल समारोह के दौरान मार्ग में अत्यधिक भीड़भाड़ होने की वजह से सुरक्षा और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन को जयस्तंभ चौराहे से यातायात को अन्य मार्गों पर डायवर्ट करना पड़ा। लगभग चार घंटे के लंबे सफर के बाद यह चल समारोह रात करीब 12 बजे अपने गंतव्य यानी झांकी स्थल पर संपन्न हुआ।
पिछले तीन वर्षों से यहीं हो रही है स्थापना
आयोजकों के अनुसार, बोहरा मस्जिद के सामने पिछले तीन साल से लगातार 'गुना के राजा' की प्रतिमा को स्थापित किया जाता रहा है। यहां होने वाले सार्वजनिक उत्सव में यह भव्य चल समारोह मुख्य आकर्षण का केंद्र रहता है, जिसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!