गुना नगरपालिका परिषद के भीतर प्रशासनिक मोर्चे पर चल रही तनातनी अब खुलकर सामने आ गई है। नगरपालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता ने केंद्रीय मंत्री एवं स्थानीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को एक विस्तृत और शिकायती पत्र भेजा है, जिसमें स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ पार्टी के कुछ आंतरिक विरोधियों पर भी गंभीर आरोप जड़े गए हैं।

विकास कार्यों और टेंडर प्रक्रिया पर रोक के आरोप

पत्र में नपाध्यक्ष ने शहर की साफ-सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइटों के संचालन, विकास कार्यों के रुकने और मुक्तिधाम के जीर्णोद्धार में हो रही देरी के लिए सीधे तौर पर अधिकारियों की मनमानी व हठधर्मिता को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि पिछले 16 महीनों के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ा गई है।

अध्यक्ष के मुताबिक, तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर व प्रभारी सीएमओ और वर्तमान सीएमओ द्वारा बिना किसी उचित संज्ञान के विकास कार्यों से जुड़े लगभग 65 टेंडर या तो निरस्त कर दिए गए या फिर उन्हें अटका दिया गया है, जिससे शहर का विकास कार्य प्रभावित हो रहा है।

चुनावी सफलता और आंतरिक साजिश का जिक्र

अपने तीन पन्नों के पत्र में सविता गुप्ता ने जिक्र किया है कि 16 महीने पहले तक सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा था। इसी का परिणाम था कि विधानसभा, लोकसभा और उप-चुनावों में भाजपा ने रिकॉर्ड जीत हासिल की। अकेले गुना नगर पालिका क्षेत्र से ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को लोकसभा चुनाव में 56 हजार से अधिक मतों की बढ़त मिली थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस बड़ी सफलता के बाद पार्टी के भीतर मौजूद कुछ द्वेष भावना रखने वाले लोगों ने उन्हें और उनके पति, जो कि पूर्व वरिष्ठ भाजपा नेता हैं, को नीचा दिखाने के लिए षड्यंत्र रचना शुरू कर दिया। अधिकारियों को मोहरा बनाकर व्यवस्थाओं को जानबूझकर बाधित किया गया।

महिला जनप्रतिनिधि के अपमान का आरोप और इस्तीफे की चेतावनी

नपाध्यक्ष ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे अपनी नाकामी छिपाने के लिए कलेक्टर और वरिष्ठ नेतृत्व को गुमराह कर रहे हैं। उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया, झूठी शिकायतों पर एडीएम स्तर की जांचें बिठाई गईं और परिवार के पेट्रोल पंप की जांच कराकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

उन्होंने कहा कि ट्रिपल इंजन की सरकार होने के बावजूद एक महिला जनप्रतिनिधि के स्वाभिमान को लगातार ठेस पहुंचाई जा रही है। पत्र के अंत में चेतावनी भरे लहजे में उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यही हालात बने रहे, तो उन्हें मजबूरी में अपने पद से इस्तीफा देकर घर बैठना पड़ेगा।