गुना शहर में रविवार शाम को अचानक मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया। देखते ही देखते आधे घंटे से अधिक समय तक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। बिन मौसम हुई इस तेज बरसात से जहां शहर की मुख्य सड़कें जलमग्न हो गईं, वहीं इसका सबसे गंभीर असर स्थानीय कृषि क्षेत्र और व्यापार पर देखने को मिला है।

खेतों में कटी पड़ी मक्का पर पड़ी मार

क्षेत्र में हुई इस बारिश ने खेतों और खलिहानों में कटी पड़ी मक्का की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। कंबाइन हारवेस्टर से काटी गई मक्का में पहले से ही नमी की मात्रा अधिक होती है। ऐसे में खुले में रखे मक्का के दानों पर पानी पड़ने से उनके खराब होने और फंगस तेजी से फैलने का खतरा मंडराने लगा है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पानी से भीगी मक्का की गुणवत्ता प्रभावित होती है जिससे उसमें सड़न पैदा हो जाती है। यह फसल इंसान और मवेशियों दोनों के उपभोग के लायक नहीं रहती। फसल गीली होने के कारण मंडियों में व्यापारी भी इसे बहुत कम दामों में खरीदते हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक चपत लगने का अंदेशा है।

मंडी प्रांगण में नालियों में बहा मक्का

उधर दूसरी तरफ व्यापारियों को भी इस बेमौसम बारिश से तगड़ा झटका लगा है। पिछले एक हफ्ते में व्यापारियों ने किसानों से हजारों क्विंटल मक्का की खरीदी की थी। यह खरीदी गई मक्का मंडी प्रांगण में ही खुले में सुखाई जा रही थी, जो अचानक हुई बारिश के दौरान पानी के साथ बह गई।

मंडी के निचले हिस्सों में तो मक्का बहकर सीधे नालियों तक पहुंच गई। देर रात तक व्यापारी अपनी इस भीगी और बर्बाद फसल को समेटते हुए नजर आए। व्यापारियों का कहना है कि इस अप्रत्याशित बारिश के कारण उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।

प्रशासनिक सर्वे के बाद स्पष्ट होगा नुकसान

गौरतलब है कि रविवार सुबह से ही बादल छाए हुए थे और शाम करीब 6 बजे तेज हवा व बिजली की चमक के साथ जोरदार बारिश शुरू हो गई थी, जो लगभग एक घंटे तक जारी रही। इस बारिश के कारण शहर में चल रहे नवरात्र महोत्सव की झांकी समितियों को भी अपनी व्यवस्थाएं संभालने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। मौसम विभाग के अनुसार इस दिन अधिकतम तापमान 34.8 और न्यूनतम तापमान 21.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे तत्काल अपनी फसल के ढेरों के आसपास से पानी निकासी का प्रबंध करें और कटी हुई फसल को ढकने का प्रयास करें। हालांकि, इस बेमौसम बारिश से हुए कुल नुकसान का सटीक आकलन अब प्रशासनिक और कृषि विभाग की सर्वे रिपोर्ट सामने आने के बाद ही हो सकेगा।