गुना नगरपालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) शैलेश अवस्थी का एक बयान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। सीसीआई पार्क में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने शहर के विकास और उसकी पहचान को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने लोगों की उस आम धारणा पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें अक्सर गुना की तुलना इंदौर से की जाती है।

सीसीआर पार्क में नए तिरंगे की स्थापना के दौरान दिया बयान

यह पूरा मामला शुक्रवार को गुना के सीसीआई पार्क में आयोजित एक कार्यक्रम का है। इस पार्क में जिले का सबसे बड़ा तिरंगा स्थापित किया गया है। जानकारी के मुताबिक, कुछ महीने पहले पुराना तिरंगा खराब हो जाने के कारण उसे उतार लिया गया था, और शुक्रवार को वहां नए तिरंगे को सम्मान के साथ फहराया गया। इसी कार्यक्रम में सीएमओ शैलेश अवस्थी ने शिरकत की थी और जनता को संबोधित किया था।

क्यों नहीं करनी चाहिए इंदौर की नकल?

कार्यक्रम के दौरान सीएमओ अवस्थी ने बताया कि लोग अक्सर उनसे मजाक में या ताने के तौर पर पूछते हैं कि वे इंदौर से आए हैं, तो गुना को इंदौर कब बना रहे हैं। इस पर उन्होंने हाथ जोड़कर लोगों से निवेदन किया कि गुना को इंदौर मत बनाइए। उन्होंने तर्क दिया कि इंदौर की अपनी अलग समस्याएं हैं, जबकि गुना एक हरा-भरा शहर है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में सबसे महंगा पानी इंदौर में ही है और वहां ट्रैफिक की समस्या भी काफी गंभीर है। इसलिए किसी की नकल करने के बजाय इंदौर अपनी जगह बेहतर बने और गुना अपनी खूबी के साथ बेहतर बने, इसी में सबकी भलाई है।

सीएमओ के लिए पूरा शहर होता है ऑफिस

अपने संबोधन में सीएमओ ने कार्यशैली पर भी बात की। उन्होंने जिक्र किया कि कुछ लोग कहते हैं कि वह कार्यालय में कम और फील्ड पर ज्यादा नजर आते हैं। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि एक सीएमओ के लिए पूरा शहर ही उसका दफ्तर होता है। यदि सिर्फ कमरे में बैठे रहेंगे, तो मैदानी सच्चाइयों से रूबरू होना मुमकिन नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि फिलहाल नगरपालिका के सामने स्टाफ और पर्याप्त फंड की बड़ी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि बिना आर्थिक संसाधनों के बड़े स्तर पर काम करना आज के समय में आसान नहीं है।

मियावाकी तकनीक से हरियाली बढ़ाने पर जोर

संसाधनों की कमी के बीच नए विकल्पों पर काम करने की बात कहते हुए सीएमओ ने जापानी तकनीक का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि झांसी में उनके एक मित्र ने कम जगह में अधिक पौधे लगाने की मियावाकी फॉरेस्टेशन तकनीक का उपयोग शुरू किया है। गुना में भी इस जापानी तकनीक को आजमाया जा सकता है, जिससे कम जमीन पर घना जंगल तैयार किया जा सके। उन्होंने अंत में विश्वास जताया कि यदि सभी लोग कंधे से कंधा मिलाकर और मिलकर प्रयास करें, तो गुना शहर को विकास की एक नई ऊंचाई तक पहुंचाया जा सकता है।