गुना के एक स्थानीय निवासी द्वारा ऑनलाइन खरीदे गए एयर कंडीशनर (एसी) को लेकर उपभोक्ता फोरम ने कड़ा रुख अपनाया है। कंपनी द्वारा सालाना बेहद कम बिजली खपत का दावा किया गया था, लेकिन घर में स्थापित होने के बाद यह उपकरण तय सीमा से चार गुना से अधिक बिजली की खपत करने लगा। बार-बार शिकायत करने के बावजूद जब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और संबंधित कंपनियों ने समस्या का समाधान नहीं किया, तो मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया।

मई 2025 में खरीदा गया था एसी

शिकायतकर्ता ने मई 2025 में फ्लिपकार्ट के माध्यम से 19,990 रुपये खर्च कर एक टन क्षमता का तीन स्टार स्प्लिट इनवर्टर एसी खरीदा था। खरीद के वक्त कंपनी के विज्ञापनों में यह दावा किया गया था कि यह मॉडल सालभर में केवल 684.9 यूनिट बिजली की खपत करेगा। हालांकि, स्थापना के तुरंत बाद ही घर का बिजली बिल अचानक काफी बढ़ गया, जिससे उपभोक्ता को संदेह हुआ।

जांच में सामने आई भारी गड़बड़ी

जब विद्युत मापक यंत्र के जरिए एसी की कार्यप्रणाली की जांच की गई, तो असलियत सामने आ गई। यह उपकरण प्रति घंटे 1.8 यूनिट बिजली खींच रहा था। यदि इसे रोजाना 12 घंटे चलाया जाए, तो अकेले महीनेभर में लगभग 432 यूनिट बिजली की खपत होने लगी थी, जो कंपनी के दावों के बिल्कुल विपरीत थी।

उपभोक्ता ने कंपनी के पोर्टल पर 15 से ज्यादा बार ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। इस दौरान लगभग 10 बार तकनीशियन घर आए और जांच की। पड़ताल में पता चला कि कंप्रेसर में तकनीकी खामी के कारण एसी केवल 15-20 मिनट ही चल पाता था और घर की एमसीबी ट्रिप हो जाती थी। एक बार उपकरण बदला भी गया, लेकिन दिक्कत बनी रही और बाद में कंपनियों ने सुनवाई बंद कर दी।

अदालत का एकतरफा फैसला और निर्देश

जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष सुरेश कुमार चौबे और सदस्य सुमीना आर्य की पीठ ने इस मामले में मोंटाना इलेक्ट्रॉनिक्स, डी.आर. फ्लिपकार्ट, फ्लिपकार्ट इंटरनेट प्राइवेट लिमिटेड और एपेक्स कंज्यूमर केयर प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी किया था। कंपनियों की ओर से कोई भी जवाब या दस्तावेज पेश न किए जाने पर आयोग ने एकतरफा सुनवाई करते हुए आदेश जारी किया।

आयोग ने कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे दो महीने के भीतर या तो एसी को पूरी तरह सुधारें या फिर उसी मॉडल का नया उपकरण उपलब्ध कराएं। ऐसा न करने की स्थिति में 19,990 रुपये की खरीद राशि सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटानी होगी। इसके अलावा मानसिक व शारीरिक कष्ट के लिए पांच हजार, मुकदमे के खर्च के रूप में दो हजार और अधिवक्ता शुल्क के तौर पर तीन हजार रुपये यानी कुल दस हजार रुपये अतिरिक्त अदा करने होंगे। तय समयसीमा में भुगतान न होने पर ब्याज दर बढ़ाकर नौ प्रतिशत कर दी जाएगी।