मध्य प्रदेश के गुना जिले में बहुचर्चित पुलिस कस्टडी मौत के मामले में आरोपी बनाए गए तत्कालीन थाना प्रभारी संजीत मावई को जमानत मिल गई है। वह पिछले साल अक्टूबर से जेल में बंद थे। अदालत से राहत मिलने के बाद अब उनके जल्द ही जेल से रिहा होने की संभावना है।

शादी से पहले उठी थी दूल्हे की अर्थी

यह पूरा घटनाक्रम साल 2024 का है। पंद्रह जुलाई 2024 को बीलाखेड़ी निवासी 25 वर्षीय देवा पारदी का विवाह गुना शहर के गोकुल सिंह चक्क क्षेत्र में तय था। चौदह जुलाई की शाम को उसकी बारात रवाना होनी थी, लेकिन इससे ठीक पहले दोपहर करीब साढ़े चार बजे पुलिस गांव पहुंच गई। जिस ट्रैक्टर पर बारात जानी थी, उसी पर सवार करके पुलिस देवा और उसके चाचा गंगाराम को एक चोरी के मामले में पूछताछ और बरामदगी के वास्ते अपने साथ ले गई थी।

उसी शाम परिजनों को जिला अस्पताल से सूचना मिली कि देवा को अस्पताल के शवगृह में लाया गया है। अस्पताल पहुंचने पर सनसनीखेज खुलासे के साथ पता चला कि पुलिस हिरासत में उसकी मौत हो चुकी है। इस खबर के बाद पारदी समाज की महिलाएं बड़ी संख्या में अस्पताल परिसर में एकत्र हो गई थीं।

परिजनों का विरोध और मजिस्ट्रियल जांच

स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि देवा की चाची और उसकी होने वाली दुल्हन ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने का प्रयास किया था, जिन्हें वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने बचा लिया। महिलाओं ने म्याना थाने के स्टाफ पर बर्बर मारपीट के आरोप लगाए थे। इसके बाद सत्रह जुलाई को कलेक्ट्रेट परिसर में भी जोरदार प्रदर्शन किया गया था।

मामले में मजिस्ट्रियल जांच बैठाई गई, जिसमें शिवपुरी मेडिकल कॉलेज की हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट और ग्वालियर एफएसएल की विसरा रिपोर्ट का मिलान किया गया। जांच में स्पष्ट हुआ कि देवा पारदी की मौत पुलिस हिरासत में प्रताड़ना और मारपीट के चलते संदिग्ध व असामान्य परिस्थितियों में हुई थी। इसके बाद म्याना थाने में गैर इरादतन हत्या व मारपीट की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद हुई थी गिरफ्तारियां

मृतक की मां अंसुरा बाई ने इस मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को जमकर फटकार लगाई थी और लाचारी का बहाना न बनाने की हिदायत दी थी। अदालत की सख्ती के बाद इस प्रकरण में फरार चल रहे अन्य पुलिसकर्मियों पर शिकंजा कसा।

तत्कालीन टीआई संजीत मावई को पिछले वर्ष पांच अक्टूबर को सीबीआई ने गुना-बदरवास रोड से स्थानीय पुलिस के सहयोग से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से वह इंदौर जेल में बंद थे। शुक्रवार को इंदौर अदालत में सुनवाई के बाद उनकी जमानत मंजूर हो गई, हालांकि कागजी प्रक्रिया पूरी होने के कारण उनकी रिहाई में थोड़ा समय लगा।