गुना जिले में संचालित 108 एम्बुलेंस सेवा से जुड़े चालकों और कर्मचारियों के बीच आपसी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। इस मामले में चालकों के दो अलग-अलग गुट बन चुके हैं, जो एक-दूसरे के विरोध में जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंप रहे हैं।

पहले गुट ने लगाए थे गंभीर आरोप

मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान एम्बुलेंस चालकों का एक गुट कलेक्टर के पास पहुंचा था। इस दौरान कर्मचारियों ने जिला मैनेजर (DM) शादाब खान पर अभद्रता करने और अनुसूचित जाति वर्ग के कर्मचारियों के साथ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया था। चालकों का कहना था कि विरोध करने पर उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। इससे पहले भी उच्च अधिकारियों को इस संबंध में अवगत कराया गया था, लेकिन कोई समाधान न मिलने पर उन्होंने डीएम को तत्काल पद से हटाने की मांग उठाई थी।

दूसरे गुट ने किया जिला मैनेजर का समर्थन

इस घटनाक्रम के कुछ दिनों बाद शुक्रवार को एम्बुलेंस चालकों का दूसरा गुट कलेक्ट्रेट पहुंचा और जिला मैनेजर के पक्ष में आवेदन दिया। समर्थन में आए चालकों ने स्पष्ट किया कि पायलट अनिल कुमार, वीरेंद्र जाटव, सुनील पालिया और ईएमटी सुमन कुशवाह द्वारा जिला मैनेजर के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से तथ्यहीन और निराधार हैं।

कर्मचारियों पर लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप

दूसरे गुट के चालकों का दावा है कि जिन कर्मचारियों ने शिकायत की है, उनके खिलाफ एचआर विभाग और कंपनी स्तर पर पहले से ही कार्य में लापरवाही और अनुशासनहीनता की शिकायतें दर्ज हैं। इन पर वाहनों के टायर व अन्य सामान बेचने, ईंधन में अनियमितता बरतने, मरीजों के परिजनों से पैसे मांगने, गाड़ियों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने और इमरजेंसी कॉल का जवाब न देने जैसी गंभीर शिकायतें हैं।

समर्थक चालकों का यह भी कहना है कि कंपनी द्वारा पूर्व में इन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा चुकी है। पिछले एक महीने से ये कर्मचारी अपनी कमियों को छिपाने के लिए जिला मैनेजर को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं और उन पर दबाव बना रहे हैं, जिससे आपातकालीन सेवा के संचालन पर बुरा असर पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में जिला मैनेजर पर कोई अनुचित कार्रवाई न की जाए।