गुना के प्रसिद्ध श्री हनुमान टेकरी मंदिर ट्रस्ट की शुक्रवार रात आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में कई बड़े निर्णय लिए गए। इस बैठक में ट्रस्ट के संरक्षक और पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया के इस्तीफे को सर्वसम्मति से नामंजूर कर दिया गया, जबकि एक अन्य ट्रस्टी का इस्तीफा स्वीकार किया गया। इसके साथ ही, मंदिर की दानपेटियां खोलने की प्रक्रिया में भी बदलाव किए गए हैं, ताकि पारदर्शिता और बढ़ाई जा सके।

एक इस्तीफा स्वीकार, दूसरा नामंजूर

ट्रस्ट कार्यालय में हुई इस बैठक के एजेंडे में सबसे पहले ट्रस्टी राजेंद्र अग्रवाल (बजरंग किराना भंडार) के इस्तीफे पर विचार किया गया। ट्रस्ट के सदस्यों ने उनकी व्यक्तिगत व्यस्तताओं को ध्यान में रखते हुए सर्वसम्मति से उनके इस्तीफे को स्वीकार करने का निर्णय लिया।

इसके बाद, पूर्व मंत्री और ट्रस्ट के संरक्षक महेंद्र सिंह सिसोदिया द्वारा दिए गए इस्तीफे पर गहन चर्चा हुई। ट्रस्ट के सभी सदस्यों ने एकमत होकर उनके इस्तीफे को अस्वीकार कर दिया। सदस्यों ने उनसे आग्रह किया कि वे संरक्षक के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाना जारी रखें, जो मंदिर और क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।

'रामायण लोक' कॉरिडोर परियोजना से उम्मीदें

ट्रस्ट के प्रवक्ता राजेश अग्रवाल ने बताया कि महेंद्र सिंह सिसोदिया के परामर्श के बाद हाल ही में केंद्रीय मंत्री और क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को एक मांग पत्र सौंपा गया था। इस पत्र में श्री हनुमान टेकरी, श्री राम टेकरी, श्री लक्ष्मण टेकरी और मकरावदा डेम को जोड़कर एक धार्मिक कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव है, जिसे 'रामायण लोक' नाम दिया जा सकता है। ट्रस्ट का मानना है कि इस परियोजना के साकार होने से गुना देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में अपनी जगह बना सकता है। इसी बड़े उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट ने महेंद्र सिंह सिसोदिया से संरक्षक पद पर बने रहने का अनुरोध किया, जिसके परिणामस्वरूप उनका इस्तीफा खारिज कर दिया गया।

दानपेटियां खोलने की व्यवस्था में बदलाव

बैठक के दूसरे महत्वपूर्ण एजेंडे में मंदिर की दानपेटियों को खोलने की प्रक्रिया पर भी विचार-विमर्श किया गया। अब तक मंदिर परिसर में दानपेटियां प्रत्येक रविवार और बुधवार को सार्वजनिक रूप से खोली जाती थीं। ट्रस्ट ने पारदर्शिता को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से एक नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के तहत, अब दानपेटियां सप्ताह में केवल एक बार, प्रत्येक बुधवार को सुबह 10:30 बजे निज मंदिर परिसर में सार्वजनिक रूप से खोली जाएंगी। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कम से कम तीन ट्रस्टियों की उपस्थिति अनिवार्य होगी, ताकि पारदर्शिता और व्यवस्थित तरीके से कार्य संपन्न हो सके।