गुना जिले के सिटी कोतवाली थाना इलाके में एक महिला के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में आरोपी बैंक मैनेजर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। न्यायालय ने मुख्य आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया है। इससे पहले इस प्रकरण के सह-आरोपी की भी जमानत अर्जी खारिज की जा चुकी है।

क्या है पूरा घटनाक्रम

गत 6 सितंबर को पीड़िता ने कोतवाली थाने पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस को दी गई जानकारी में 25 वर्षीय महिला ने बताया कि वह विंध्याचल कॉलोनी में अपने बेटे के साथ किराए के मकान में रहकर ब्यूटी पार्लर का काम करती है। उसी मकान में शैफाली शाक्य नाम की उसकी सहेली भी किराए पर निवास करती है।

पीड़िता के मुताबिक 5 सितंबर की शाम करीब छह बजे शैफाली का परिचित गोलू रघुवंशी विनेका अपने साथी विवेक रघुवंशी के साथ वहां आया था। उस वक्त कमरे में शैफाली, गोलू और विवेक बैठकर शराब पी रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान विवेक ने महिला को भी जबरन शराब का सेवन करा दिया।

दरवाजा बंद कर दिया वारदात को अंजाम

शिकायत में बताया गया कि कुछ समय बाद शैफाली और गोलू कमरे से बाहर निकलकर आपस में बात करने लगे। कमरे में अकेली महिला और विवेक ही मौजूद थे। आरोप है कि जब महिला ने विवेक को दरवाजे की कुंडी लगाते देखा और कारण पूछा, तो उसने उसे धक्का देकर नीचे गिरा दिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। महिला के शोर मचाने पर भी आवाज बाहर तक नहीं पहुंच पाई।

घटना के बाद जब पीड़िता ने मामले की शिकायत पुलिस में करने की बात कही, तो गोलू रघुवंशी विनेका ने उसे थप्पड़ मारे और जान से मारने की धमकी दी। हालांकि, इसी दौरान वहां पहुंचे पीड़िता के परिचित अजय रघुवंशी ने बीच-बचाव किया।

रेलवे स्टेशन पहुंच गई थी पीड़िता

इस घटना से गहरे सदमे और आहत होकर पीड़िता ने अपने पूर्व पति को मोबाइल पर संदेश भेजकर आपबीती सुनाई और आत्महत्या के इरादे से रेलवे स्टेशन चली गई। समय रहते पूर्व पति पुलिस दल के साथ स्टेशन पहुंचा और महिला को सुरक्षित थाने लेकर आया।

पुलिस ने इस मामले में अपराध क्रमांक 523/26 दर्ज किया है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1), 115(2), 351(3) और 127(2) के तहत कार्रवाई की जा रही है।

अदालत ने नहीं दी राहत

सिसोदिया कॉलोनी निवासी 38 वर्षीय आरोपी बैंक मैनेजर विवेक रघुवंशी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात को आधार बनाया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए और सह-आरोपी की जमानत याचिका पहले ही खारिज होने के कारण मुख्य आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती।