स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों ने शहर की गंभीर समस्याओं को लेकर गुरुवार को नगर पालिका कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन श्रीराम मुक्तिधाम की दयनीय स्थिति और शहर की सड़कों पर अनियंत्रित रूप से घूम रहे आवारा सांडों के कारण उपजी परेशानियों को लेकर किया गया।

मुक्तिधाम में जर्जर छत और अंधेरे की समस्या

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि शहर के श्रीराम मुक्तिधाम में रोजाना अंतिम संस्कार के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं, लेकिन यहां बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है। मुक्तिधाम परिसर में बने हॉल की छत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है और बारिश के दिनों में पानी टपकने के साथ ही प्लास्टर भी लगातार झड़ रहा है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा परिसर में बिजली आपूर्ति न होने के कारण कई बार परिजनों को अंधेरे में ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है।

सड़कों पर आवारा सांडों का बढ़ता आतंक

बैठक और ज्ञापन के दौरान शहर की सड़कों पर घूम रहे आवारा सांडों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इन सांडों के खौफ के कारण बच्चों को स्कूल भेजने में अभिभावकों को चिंता सताती है। बाजारों और मुख्य मार्गों से गुजरने वाले राहगीरों को भी अपनी जान जोखिम में डालकर चलना पड़ रहा है।

पंद्रह दिन का अल्टीमेटम, बड़े आंदोलन की चेतावनी

नगर पालिका अध्यक्ष और मुख्य नगर पालिका अधिकारी को संबोधित इस ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि आगामी 15 दिवस के भीतर मुक्तिधाम की मरम्मत, बिजली बहाली और आवारा सांडों से मुक्ति के ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो एक उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान राकेश मिश्रा, विश्वनाथ तिवारी, धर्मेंद्र विश्वकर्मा, नरेंद्र भादोरिया, रवि शर्मा, नंदू चौबे, लोकेश शर्मा, सुरेश धामा और प्रदीप आर.बी. सहित कई अन्य गणमान्य नागरिक और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।