गुना जिले में कानून और सामाजिक जागरूकता के तमाम दावों के बावजूद कम उम्र में विवाह के मामलों में कमी नहीं आ रही है। हाल ही में सामने आए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-6 के आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि अंचल में बाल विवाह की जड़ें अभी भी गहरी हैं।

हर चौथी युवती की 18 साल से पहले हो रही शादी

सर्वे के अनुसार, 20 से 24 वर्ष की आयु वर्ग की हर चार में से लगभग एक युवती का विवाह 18 वर्ष की निर्धारित कानूनी उम्र पूरी होने से पहले ही तय कर दिया गया। जिले में इस तरह के मामलों का अनुपात 25.9 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

हालांकि, पिछले सर्वे यानी एनएफएचएस-5 के मुकाबले इस आंकड़े में मामूली सुधार जरूर देखा गया है, जब यह अनुपात 28.1 प्रतिशत हुआ करता था। बावजूद इसके, प्रदेश के 20 प्रतिशत औसत की तुलना में गुना जिले की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।

पुरुषों में बढ़ी कम उम्र में विवाह की प्रवृत्ति

बाल विवाह के मामलों में सबसे चौंकाने वाला पहलू पुरुषों से जुड़ा सामने आया है। जिले में 25 से 29 वर्ष की उम्र के करीब 39 प्रतिशत पुरुषों की शादी 21 साल की कानूनी आयु सीमा से पहले ही संपन्न हो चुकी है।

हैरानी की बात यह है कि पिछले सर्वे में यह आंकड़ा 21.8 प्रतिशत था, जो पांच साल के भीतर बढ़कर सीधा 39 प्रतिशत पर पहुंच गया। इस समयावधि में लड़कों की कम उम्र में शादी के मामलों में 17.2 प्रतिशत अंकों की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि पूरे मध्य प्रदेश का औसत 25 प्रतिशत है।

कम उम्र में मातृत्व और शिक्षा की स्थिति

कम उम्र के विवाह का सीधा असर किशोरियों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। जिले में 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग की 8.5 प्रतिशत किशोरियां सर्वे के दौरान या तो मां बन चुकी थीं या फिर गर्भवती थीं, जो पिछले सर्वे में 5.5 प्रतिशत थीं। प्रदेश का औसत इस मामले में 5.6 प्रतिशत है।

इस स्थिति के पीछे बड़ी वजह शिक्षा की कमी को माना जा रहा है। जिले में 15 से 49 वर्ष की आयु की केवल 18.9 प्रतिशत महिलाओं ने ही 10वीं या उससे अधिक की स्कूली शिक्षा पूरी की है, जबकि प्रदेश का औसत 33.7 प्रतिशत है जो बालिका शिक्षा में पिछड़ते गुना की तस्वीर साफ करता है।