गुना जिले में खरीफ फसल की बुवाई का समय आने से पहले ही उर्वरक की भारी किल्लत सामने आने लगी है। खाद की समय पर उपलब्धता न होने से आक्रोशित किसानों ने बमोरी क्षेत्र के बागेरी स्थित डबल लॉक खाद वितरण केंद्र के बाहर मुख्य सड़क पर जाम लगा दिया। यह प्रदर्शन दोपहर करीब बारह बजे शुरू हुआ और लगभग ढाई घंटे तक जारी रहा, जिससे मार्ग के दोनों छोर पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
बुवाई से डेढ़ महीने पहले ही क्यों बढ़ी खाद की मांग
हालांकि आगामी खरीफ फसल की बुवाई में अभी लगभग डेढ़ महीने का वक्त शेष है, लेकिन पिछले सीजन के कड़वे अनुभवों को भुगत चुके किसान इस बार किसी भी तरह की लापरवाही से बचना चाहते हैं। वे समय पर खाद का भंडारण सुनिश्चित करना चाह रहे हैं, जिसके चलते सीजन की शुरुआत से काफी पहले ही केंद्रों पर भारी भीड़ उमड़ने लगी है और मांग में अचानक उछाल आया है।
यातायात हुआ प्रभावित, प्रशासनिक अमला पहुंचा मौके पर
बुधवार को बड़ी तादाद में अन्नदाता बागेरी डबल लॉक केंद्र पर यूरिया और अन्य उर्वरक लेने के लिए पहुंचे थे। जब उन्हें वहां से निराश लौटना पड़ा तो उनका धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने सड़क पर बैठकर आवागमन ठप कर दिया। इस चक्काजाम की वजह से रूट पर कई बसें भी फंस गईं, जिससे सफर कर रहे आम यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक महकमे के अधिकारी तुरंत हरकत में आए और घटनास्थल पर पहुंचे।
अधिकारियों ने करीब ढाई घंटे तक कड़ाके की स्थिति के बीच किसानों को समझाइश दी और उनकी समस्याओं का समाधान करने का भरोसा दिलाया, जिसके बाद जाकर जाम को समाप्त कराया जा सका और यातायात सुचारू रूप से शुरू हुआ।
ऑनलाइन पोर्टल की गड़बड़ियों से परेशान हैं किसान
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि खाद वितरण के लिए बनाई गई ऑनलाइन बुकिंग साइट ठीक से काम नहीं कर रही है। पोर्टल पर सर्वर की समस्या और तकनीकी खामियों के कारण खाद की बुकिंग नहीं हो पा रही है। किसानों का कहना है कि जब वे पोर्टल खोलते हैं तो सभी टोकन पहले से ही बुक दर्शाए जाते हैं और यदि किसी तरह टोकन जेनरेट हो भी जाए, तो भी गोदाम पर पहुंचने पर उन्हें खाद मुहैया नहीं कराई जाती है।
केंद्रीय मंत्री के समक्ष भी रखा था यह मुद्दा
खाद की कालाबाजारी और इस मारामारी से परेशान किसानों ने बीते 17 सितंबर को गुना प्रवास पर आए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने भी यह तकलीफ प्रमुखता से रखी थी। स्थानीय सर्किट हाउस में जब केंद्रीय मंत्री नागरिकों से मिल रहे थे, तब किसानों ने पहुंचकर उन्हें अपनी बदहाली से अवगत कराया था और खाद की निर्बाध आपूर्ति की मांग की थी।
महाराज जिंदगी हो गई माला पहनाते-पहनाते, लेकिन खाद नहीं मिल पा रही है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!