गुना जिले के आरोन इलाके में जमीन के विवाद के चलते हुई सरकारी शिक्षक ब्रह्मदास अहिरवार की हत्या के मामले में आरोपी पक्ष को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने इस सनसनीखेज हत्याकांड के आरोपी संतोष का जमानत आवेदन खारिज कर दिया है। आरोपी पक्ष की ओर से मामले में अन्य लोगों को जमानत मिलने का हवाला देते हुए राहत मांगी गई थी, जिसे अदालत ने नामंजूर कर दिया।

एक बीघा जमीन को लेकर चल रहा था पुराना विवाद

आरोन के गेहूंखेड़ा निवासी 50 वर्षीय ब्रह्मदास अहिरवार वर्ग-2 के सरकारी शिक्षक थे और माता मूडरा हाई स्कूल में कला विषय पढ़ाते थे। गांव में एक बीघा जमीन के मालिकाना हक को लेकर उनका दूसरे पक्ष के साथ काफी समय से विवाद चल रहा था। शिक्षक का पक्ष था कि उनकी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है, जिसके बाद राजस्व विभाग ने सीमांकन कर जमीन उनके नाम तय करते हुए कब्जा भी सौंप दिया था।

स्कूल से लौटते वक्त हुआ था जानलेवा हमला

जून 2025 की इस घटना में 28 तारीख को शिक्षक ब्रह्मदास स्कूल से पढ़ाने के बाद दोपहर करीब तीन बजे गांव के बाहर स्थित एक वेयरहाउस के पास बैठे थे। तभी घात लगाकर पहुंचे दूसरे पक्ष के लोगों ने उन पर फरसे और लुहांगी जैसे धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस खूनी संघर्ष में शिक्षक के अलावा उनका बेटा सत्या और वेयरहाउस कर्मचारी निक्की जाटव भी गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे।

हमले के बाद गंभीर हालत में शिक्षक को अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। वहीं घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पुलिस ने इस मामले में पूर्व सरपंच रघुवीर कोरी समेत वीर सिंह, भद्दू, अमर सिंह, दिमान सिंह, लखन, संतोष, कमल सिंह, सोनू और रवि सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की थी।

कोर्ट ने बताई आरोपी की अलग और गंभीर भूमिका

सुनवाई के दौरान आरोपी संतोष के वकील ने दलील दी थी कि सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर संतोष को भी जमानत दी जाए। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि संतोष पर शिक्षक के सिर पर फरसे से वार करने का गंभीर आरोप है, जिससे उसकी भूमिका अन्य आरोपियों से अलग है।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी टिप्पणी की कि यदि आरोपी को रिहा किया जाता है, तो उसके फरार होने और गवाहों तथा साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने की प्रबल संभावना बनी हुई है। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने आरोपी की जमानत याचिका पूरी तरह से खारिज कर दी।