गुना जिले के सिंगवासा क्षेत्र में चल रहे ओवरब्रिज निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है। यहां बनाए जा चुके चार पिलर्स को अचानक तोड़कर हटा दिया गया है। इन संरचनाओं को ब्रिज के मुख्य आधार के रूप में तैयार किया गया था, जिसमें भारी मात्रा में सीमेंट, सरिया और कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया था।
मिट्टी धंसने का दिया गया तर्क
परियोजना से जुड़े अधिकारियों का पक्ष है कि जिस स्थान पर ये पिलर खड़े किए गए थे, वहां की मिट्टी काफी भुरभुरी है और उसके धंसने की आशंका बनी हुई थी। अधिकारियों के अनुसार, यदि ऐसा होता तो पिलर नीचे बैठ सकते थे जिससे पूरे ब्रिज की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो सकता था। कंक्रीट के इन मजबूत स्तंभों को हटाने के लिए पहले जेसीबी का इस्तेमाल किया गया, लेकिन सफलता न मिलने पर भारी मशीनों की मदद से इन्हें उखाड़ दिया गया।
पुराने अंडरब्रिज की दिक्कतों से मिला था नया प्रोजेक्ट
गुना-अशोकनगर मार्ग पर करीब दस वर्ष पूर्व दो रेलवे अंडरब्रिज बनाए गए थे। इनकी कम ऊंचाई के कारण बड़े और ऊंचे ट्रक वहां से गुजर नहीं पाते थे। वाहन चालकों और ट्रांसपोर्टरों को मजबूरन ट्रकों का माल बीच रास्ते में उतारकर दूसरी तरफ फिर से लोड करना पड़ता था, जिससे समय और श्रम दोनों की बर्बादी होती थी।
करोड़ों की लागत से आकार ले रहे हैं दो ओवरब्रिज
इस समस्या के समाधान के लिए केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने पिछले वर्ष गुना-अशोकनगर मार्ग पर दो नए ओवरब्रिज निर्माण की स्वीकृति दी थी। इन दोनों टू-लेन ब्रिजों की कुल अनुमानित लागत 57.34 करोड़ रुपए है। इनमें से सिंगवासा ओवरब्रिज पर 35.20 करोड़ रुपए और मावन ओवरब्रिज पर 22.14 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा पिछले साल नवंबर माह में इन दोनों निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया गया था। निर्धारित योजना के अनुसार इस परियोजना का कार्य वर्ष 2027 तक पूरा किया जाना है, लेकिन शुरुआती स्तर पर ही पिलर गिराए जाने की घटना ने निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर चर्चाएं छेड़ दी हैं।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!