गुना शहर में मंगलवार को विजयदशमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान स्थानीय दशहरा मैदान पर 51 फीट ऊंचे रावण के पुतले का पारंपरिक तरीके से दहन किया गया। इस वर्ष रावण के पुतले को धोती-कुर्ते के स्थान पर आकर्षक शेरवानी पहनाई गई थी, जिसका यह नया रूप कार्यक्रम में पहुंचे दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना रहा।

भव्य शोभायात्रा और राम-रावण युद्ध का मंचन

दहन समारोह से पहले शहर में भगवान राम की एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यह यात्रा सदर बाजार, हाट रोड, हनुमान चौराहा और कैंट चौराहा जैसे प्रमुख मार्गों से होते हुए दशहरा मैदान तक पहुंची। यात्रा में शामिल एक रथ पर भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान के स्वरूप सुसज्जित थे, जबकि दूसरे रथ पर रावण और उसकी मंडली चल रही थी। मैदान में पहुंचने के बाद अतिथियों ने भगवान के स्वरूपों की आरती उतारी और इसके बाद राम-रावण संवाद व युद्ध का रोमांचक मंचन किया गया।

अतिथियों ने दी शुभकामनाएं और बुराई मिटाने का संदेश

युद्ध के मंचन के उपरांत भगवान राम के स्वरूप वाले कलाकार ने जलता हुआ तीर छोड़ा, जिससे 51 फीट ऊंचा रावण का पुतला धू-धू कर जल उठा। इस दौरान पूरा प्रांगण जय श्री राम के नारों से गूंज उठा। इस आयोजन में शहर के तमाम जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित रहे।

समारोह के दौरान आरएसएस के विभाग प्रचारक नितिन अग्रवाल ने कहा कि दशहरे पर केवल पुतला जलाना ही काफी नहीं है, बल्कि जीवन से तमाम बुराइयों को समाप्त करने का संकल्प लेना भी आवश्यक है। विधायक पन्नालाल शाक्य और नगर पालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता ने भी विजयादशमी की बधाई देते हुए इसे असत्य पर सत्य की जीत बताया। साथ ही कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल और एसपी हितिका वासल ने भी नागरिकों को पर्व की शुभकामनाएं दीं और जिले से नशे की बुराई को पूरी तरह मिटाने का आह्वान किया।

कान्हा सदन के बच्चों ने खुद बनाया 7 फीट का पुतला

मुख्य आयोजनों के अलावा शहर के सहयोग हॉस्पिटल के पास स्थित कान्हा सदन में बच्चों ने विशेष पहल की। यहां अर्श, भव्या, अयांश, वाणी, आदि और विहा ने मिलकर 7 फीट ऊंचा एक अलग रावण पुतला तैयार किया। इसे बनाने में बच्चों ने रद्दी कागज, सूखी घास, पुरानी लकड़ी, कंडे और क्राफ्ट पेपर जैसी सामग्रियों का उपयोग किया।

इस रचनात्मक गतिविधि के दौरान घर के बड़ों ने बच्चों को रावण के अहंकार और उसके पतन की कथा से परिचित कराया। बड़ों ने समझाया कि रावण दहन केवल एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर के अहंकार, क्रोध, लालच और ईर्ष्या जैसी बुराइयों का त्याग करने की सीख देता है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम की विजय हमें हमेशा सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान करती है।