गुना जिले के बमौरी इलाके में आदिवासियों की पट्टे पर दी गई जमीनों पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर सख्त कदम उठाए गए हैं। यहां के गैर-आदिवासियों द्वारा करीब 65 जनजातीय परिवारों की जमीन पर कब्जा करने के मामले सामने आए थे।
SDM कोर्ट के आदेश के बाद भी दोबारा जमाया कब्जा
मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 170-बी के तहत चली जांच में 65 ऐसे मामले पकड़े गए थे जहां शासन द्वारा आदिवासियों को आवंटित जमीन पर दूसरों ने कब्जा कर रखा था। SDM न्यायालय द्वारा इन मामलों में बेदखली के आदेश जारी किए गए थे और जमीन का वास्तविक कब्जा संबंधित भू-स्वामियों को सौंप दिया गया था।
लेकिन इसके बावजूद आरोपी बाज नहीं आए और उन्होंने प्रशासनिक कार्रवाई के बाद फिर से उन जमीनों पर कब्जा कर खेती करना शुरू कर दिया था। इस बात की लगातार शिकायतें प्रशासन तक पहुंच रही थीं।
केंद्रीय मंत्री के निर्देश के बाद तेज हुई कार्रवाई
बीते दिनों 16 से 19 सितंबर के दौरान गुना प्रवास पर आए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समक्ष भी आदिवासियों की जमीन हड़पने का यह गंभीर मुद्दा उठाया गया था। दिशा की बैठक में भी यह मामला प्रमुखता से रखा गया था, जहां केंद्रीय मंत्री ने प्रशासन को दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
एसडीएम के पत्र पर 23 लोगों पर FIR दर्ज
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम शिवानी पांडे ने एक अक्टूबर को बमौरी थाना प्रभारी को पत्र लिखकर प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। पुलिस ने निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए लगभग 23 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
दर्ज की गई FIR में आरोपियों पर दूसरों की संपत्ति में जबरन घुसने और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) की सुसंगत धाराओं के तहत केस बनाया गया है। इसमें अमरोट, दलबी नगर गुना और बमौरी क्षेत्र के रहने वाले आरोपी शामिल हैं।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!