पाठ्यक्रम में जुड़ेंगे नए और ऐतिहासिक अध्याय

गुना स्थित क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं अब अपने शिक्षण संस्थान के नाम से जुड़े महान नायक तात्या टोपे के जीवन चरित्र और उनके ऐतिहासिक योगदान का विस्तृत अध्ययन कर सकेंगे। आने वाले शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्नातक प्रथम वर्ष के राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम में 1857 के गदर में उनकी भूमिका को आधिकारिक रूप से जोड़ा जा रहा है।

दर्शन और राजनीतिक चिंतन को भी मिली जगह

इतिहास के साथ-साथ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के राजनीतिक दर्शन और उनके प्रसिद्ध महाकाव्य 'मूकमाटी' को भी यूनिवर्सिटी के सिलेबस का हिस्सा बना लिया गया है। यह महत्वपूर्ण निर्णय राजनीति विज्ञान, हिंदी और समाजशास्त्र विषयों के अध्ययन मंडलों की हुई पहली बैठकों के दौरान सर्वसम्मति से लिया गया।

इन बैठकों की श्रृंखला में कुल गुरु डॉ. किशन यादव, कुल सचिव प्रोफेसर ए.के. मुद्गल के अलावा विभिन्न संकाय प्रतिनिधि और शिक्षक विशेष रूप से उपस्थित रहे। राजनीति विज्ञान अध्ययन मंडल की बैठक डॉ. प्रभात चौधरी की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें बाहर से पधारे विशेषज्ञ डॉ. कुसुम भदौरिया और श्याम मोहन मिश्रा ने भी अपनी सहभागिता निभाई।

विस्तृत हुआ अध्ययन का दायरा

निर्धारित बदलाव के तहत स्नातक प्रथम वर्ष के प्रश्न पत्र 'भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन' (सी-2) की पहली इकाई में तात्या टोपे की जीवन यात्रा, उनके राजनीतिक विचारों तथा स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए योगदान को शामिल किया गया है। वहीं दूसरी ओर, स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष के 'भारतीय राजनीतिक चिंतन' (सी-11) विषय की पांचवीं इकाई में आचार्य श्री विद्यासागर जी के राजनीतिक चिंतन को स्थान दिया गया है।

इस प्रक्रिया के दौरान शिवपुरी से डॉ. शालिनी राय और बीकानेर से डॉ. शशि वर्मा को विषय विशेषज्ञ के रूप में सहयोजित किया गया था। इसी प्रकार हिंदी विषय की बैठक डॉ. महाविद्या उपाध्याय की अगुवाई में हुई, जिसमें डॉ. अचला पाण्डेय और डॉ. शिव प्रकाश त्रिपाठी ने विशेषज्ञ के तौर पर भाग लिया। समाजशास्त्र विभाग की बैठक की अध्यक्षता डॉ. अरविन्द कुमार शर्मा ने की, जहां डॉ. जितेन्द्र कुमार तिवारी बाहरी विशेषज्ञ के रूप में शामिल रहे।