गुना जिले के बमोरी क्षेत्र में आस्था का एक ऐसा केंद्र मौजूद है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और प्राचीनता के लिए दूर-दूर तक जाना जाता है। जिला मुख्यालय से लगभग 75 किलोमीटर और बमोरी ब्लॉक मुख्यालय से 35 किलोमीटर की दूरी पर घने जंगलों के बीच निहालगढ़ गांव बसा हुआ है। इसी ग्रामीण आंचल के भीतर एक ऊंची पहाड़ी पर मां दुर्गा का यह प्राचीन मंदिर स्थापित है।
150 फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजी हैं अष्टादशभुजा माता
यह धार्मिक स्थल समतल भूमि से करीब 150 फीट ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। यहां पहुंचने वाले भक्तों को मां के दर्शन के लिए दुर्गम रास्तों और हरियाली से घिरे परिवेश से गुजरना पड़ता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां माता रानी अष्टादशभुजा यानी 18 भुजाओं वाले स्वरूप में विराजमान हैं, जिनके अलौकिक दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है।
राजा निहाल सिंह द्वारा कराया गया था निर्माण
मंदिर के पुजारी अशोक महाराज के अनुसार, इस पवित्र स्थल का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। स्थानीय मान्यताओं और जनश्रुतियों के मुताबिक, प्राचीन काल में इस क्षेत्र के राजा निहाल सिंह ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। उन्हीं के नाम पर इस इलाके का नाम निहालगढ़ और देवी का नाम निहालदेवी पड़ा, जो आज भी क्षेत्र के प्रमुख आस्था केंद्रों में शुमार है।
पड़ोसी राज्यों से भी पहुंचते हैं श्रद्धालु
चूंकि यह मंदिर मध्य प्रदेश की सीमा के अंतर्गत आता है, इसलिए यहां स्थानीय जिलों के अलावा पड़ोसी राज्य राजस्थान से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में माता के दर्शन करने पहुंचते हैं। चारों तरफ फैली हरियाली और शांत वातावरण इस स्थान को और भी अधिक मनमोहक और आध्यात्यमिक ऊर्जा से परिपूर्ण बनाता है।
मंदिर में आने वाले भक्तों की ऐसी अटूट मान्यता है कि यहां सच्चे मन से जो भी मन्नत मांगी जाती है, माता उसे अवश्य पूरा करती हैं। मनोकामना पूरी होने के उपलक्ष्य में श्रद्धालु मंदिर में विशेष रूप से झंडा और घंटियां अर्पित करते हैं। इसके अलावा, कई भक्त अपनी ओर से यहां भंडारों का आयोजन भी करवाते हैं।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!