जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट भवन में मंगलवार को साप्ताहिक जनसुनवाई का आयोजन किया गया। इसमें दतिया जिले के विभिन्न ग्रामीण अंचलों और शहरी क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने अपनी-अपनी समस्याएं प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष रखीं। कलेक्टर स्वप्निल बानखड़े ने एक-एक कर सभी की शिकायतें सुनीं और संबंधित विभागों के अधिकारियों को तय समयसीमा में इनका उचित निराकरण करने के निर्देश दिए।
एमए-बीएड और टीईटी पास दिव्यांग का दर्द, कहा- भीख मांगना शिक्षा का अपमान
कलेक्ट्रेट में सबसे ज्यादा चर्चा रिछरा फाटक निवासी भानु प्रकाश पटवा के आवेदन की रही। जन्म से अस्थिबाधित दिव्यांग भानु प्रकाश ने जनसुनवाई में पहुंचकर रोजगार की गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि उन्होंने एमए और बीएड की डिग्री हासिल करने के अलावा टीईटी और सुपर टीईटी की परीक्षाएं भी पास की हैं। पारिवारिक आर्थिक स्थिति ठीक न होने और शारीरिक अक्षमता के कारण वे कठिन परिश्रम करने में असमर्थ हैं। उन्होंने अतिथि शिक्षक या योग्यता के अनुरूप अन्य शासकीय पद पर रोजगार देने का अनुरोध किया। अपने आवेदन में उन्होंने यह भी लिखा कि वे मजबूरी में भीख मांगकर पेट भरने को मजबूर नहीं होना चाहते, क्योंकि यह उनकी वर्षों की पढ़ाई और डिग्रियों का अपमान होगा।
दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और सोलर कनेक्शन का मुद्दा भी गूंजा
जनसुनवाई के दौरान अन्य कई गंभीर मामले भी सामने आए। ग्राम तिलैथा के रहने वाले ओमप्रकाश रावत ने बताया कि गंभीर बीमारी (गैंगरीन) के चलते उनके दोनों पैर बारी-बारी से काटने पड़े हैं। वर्तमान में उनके पास 60 फीसदी का दिव्यांगता प्रमाण-पत्र है, जबकि चिकित्सकों के अनुसार उनकी दिव्यांगता 80 प्रतिशत है। उन्होंने प्रमाण-पत्र का दायरा बढ़ाने के साथ ही एक ट्राईसाइकिल दिलाने की मांग की। वहीं, ग्राम कुलैथ के किसान बादाम सिंह जाटव ने प्रधानमंत्री कृषक मित्र योजना के तहत तीन एचपी का सोलर कनेक्शन न मिलने की शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि वे योजना के तहत 20,968 रुपए की दो किस्तें जमा कर चुके हैं, लेकिन एक साल से अधिक बीत जाने के बावजूद उन्हें सोलर पंप का लाभ नहीं मिला है।
सांप के डसने से मवेशी मौत और मध्यान्ह भोजन में लापरवाही की शिकायत
बड़ौनी तहसील के डंगरा गांव के निवासी मुलायम जाटव ने अपनी दो भैंसों की मौत का मुआवजा मांगा। उन्होंने बताया कि 29 अगस्त को जहरीले सांप के काटने से उनकी दोनों भैंसों की मौत हो गई थी, जिसकी पुष्टि पशु चिकित्सक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी हुई है। उन्होंने आरबीसी के प्रावधानों के तहत आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत कराने का आवेदन दिया। इसके अलावा, ग्राम रानीपुरा के ग्रामीणों ने स्कूल में 15 से 21 सितंबर के बीच लगातार सात दिनों तक बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन न बनाए जाने की शिकायत दर्ज कराई और संबंधित सहायता समूह पर कार्रवाई की मांग की।






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बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!