ग्वालियर-चंबल अंचल के दतिया जिले में शरद पूर्णिमा का पर्व स्वास्थ्य और आस्था के एक बड़े आयोजन के रूप में मनाया गया। रिछरा फाटक रोड पर स्थित गुर्जर वाटिका में दमा यानी अस्थमा से पीड़ित मरीजों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई औषधि युक्त खीर का निःशुल्क वितरण किया गया।

सुंदरकांड पाठ से हुआ कार्यक्रम का आरंभ

इस पारंपरिक स्वास्थ्य शिविर और धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत रविवार की रात 9 बजे सुंदरकांड के पाठ के साथ की गई। इसके बाद अनुष्ठान के अगले चरण में सोमवार तड़के चार बजे से मरीजों को खीर खिलाने का सिलसिला शुरू हुआ, जो सूर्योदय तक चला।

चांद की रोशनी में रखी गई थी दो क्विंटल दूध की खीर

आयोजक डॉ. आर.के. बुंदेला ने जानकारी दी कि दमा के मरीजों के लिए यह विशेष खीर गाय के दो क्विंटल शुद्ध दूध से तैयार की गई थी। शरद पूर्णिमा की रात इस खीर को खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की किरणों के प्रभाव में रखा गया था, जिसके बाद तड़के चार बजे से मरीजों और श्रद्धालुओं को इसका सेवन कराया गया। सूर्योदय होते ही वितरण प्रक्रिया समाप्त कर दी गई।

देशभर से पहुंचे आठ हजार से अधिक मरीज

मरीजों की अत्यधिक संख्या को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष का यह आयोजन गुर्जर वाटिका में रखा गया था। स्थानीय दतिया और आसपास के ग्रामीण अंचलों के अलावा ग्वालियर, मुरैना, झांसी, ललितपुर, कानपुर, मुंबई, हरियाणा, पंजाब और बिहार जैसे विभिन्न राज्यों से पहले ही पंजीयन करा चुके आठ हजार से अधिक मरीज रविवार की देर रात तक दतिया पहुंच चुके थे।

खान-पान को लेकर दी गई विशेष हिदायतें

डॉ. बुंदेला ने औषधि ग्रहण करने वाले सभी मरीजों को आहार और खान-पान में कड़ाई से सावधानी बरतने की सलाह दी है। मरीजों को केवल सादा और गर्म भोजन करने की हिदायत दी गई है। आहार में चने का सूप, चने और जौ का आटा, बाजरा, मूंग, लौकी, तुरई, पुदीना, मूली, गाजर, चीकू, मीठा सेब, मुनक्का, बादाम, पपीता, अदरक, लौंग, तुलसी पत्र, काली मिर्च, सेंधा नमक, जीरा और शहद शामिल करने की सलाह दी गई है।

इसके विपरीत, उड़द की दाल, केला, संतरा, तरबूज, पनीर, ब्रेड, मटर तथा पचने में भारी यानी गरिष्ठ भोजन से पूरी तरह परहेज करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोजक के अनुसार, इन वर्जित खाद्य पदार्थों का सेवन करने से दमे की तकलीफ बढ़ सकती है।