दतिया शहर और बड़ौनी कस्बे की जल आवश्यकताओं को पूरा करने वाले रामसागर तालाब को अब नए सिरे से संवारने की तैयारी है। इस योजना के तहत तालाब की पाल को मजबूत करने के साथ-साथ इसकी संरचना को भी जरूरत के अनुसार सुदृढ़ किया जाएगा। इसी कड़ी में जिगना स्थित सोमला डेम और कासना तालाब का जीर्णोद्धार भी किया जाएगा।
विशेषज्ञ टीम के निरीक्षण के बाद तैयार होगी डीपीआर
मध्य प्रदेश शासन की कंप्रिहेंसिव डेम सेफ्टी इवैल्यूएशन यानी सीडीएसई की चार सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने हाल ही में इन तीनों जलाशयों का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया है। टीम द्वारा सौंपी जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर जल संसाधन विभाग विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करेगा जिसे मंजूरी के लिए शासन के पास भेजा जाएगा। शासन स्तर से बजट स्वीकृत होते ही मरम्मत और निर्माण कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।
ये सभी तालाब और डेम क्षेत्र के भूजल स्तर को ऊंचा उठाने के साथ-साथ कृषि कार्यों के लिए भी मुख्य जल स्रोत हैं। पिछले तीन वर्षों के दौरान अच्छी बारिश के चलते रामसागर तालाब में मिट्टी धंसने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, जिसके मद्देनजर डेम सेफ्टी एक्ट के अंतर्गत इन जलाशयों की सुरक्षा और मरम्मत का कार्य बेहद जरूरी हो गया है।
सोंय नाले पर स्टॉप डेम बनने से रैपुरा और बड़ौनकलां के किसानों को राहत
तालाबों के जीर्णोद्धार के अलावा जल संसाधन विभाग द्वारा सोंय नाले पर दो करोड़ रुपये की लागत से एक नया स्टॉप डेम बनाया जाएगा। चार मीटर ऊंचा यह कंक्रीट डेम 0.5 एमसीएम क्षमता का होगा जिससे रैपुरा और बड़ौनकलां गांव के किसानों को सिंचाई में बड़ी मदद मिलेगी।
इस डेम के निर्माण से करीब 50 करोड़ लीटर पानी सहेजा जा सकेगा, जिससे बारिश का पानी सीधे सिंध नदी में बहकर जाने से रुकेगा। संग्रहित पानी से किसान अपनी फसलों की सिंचाई कर सकेंगे और क्षेत्र के बोरवेल तथा ट्यूबवेल भी रिचार्ज होंगे। विभाग द्वारा इसकी डीपीआर तैयार करके प्रशासकीय स्वीकृति के लिए इसी महीने शासन को भेजी जा चुकी है।
रबी सीजन में समय पर मिल सकेगा सिंचाई का पानी
रैपुरा और बड़ौनकलां गांव सिंध नदी के मुहाने पर बसे हुए हैं लेकिन अधिक ऊंचाई होने के कारण यहां भूजल स्तर तेजी से गिरता है। हालांकि इन गांवों को सिंध परियोजना की नहरों से भी पानी मिलता है लेकिन ये गांव परियोजना के अंतिम छोर पर हैं जिसके चलते रबी सीजन में नहर का पानी पहुंचने में देरी हो जाती है।
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन इंजीनियर मोहित जैन ने बताया कि एक स्टॉप डेम के लिए प्रस्ताव भेजा गया है जिसकी जल्द मरम्मत की उम्मीद है। साथ ही, डेम सेफ्टी एक्ट के प्रावधानों के तहत तालाबों की मरम्मत का कार्य भी विशेषज्ञ टीम के निरीक्षण और रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद आगे बढ़ाया जाएगा।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!