दतिया नगर पालिका क्षेत्र में सफाई कर्मचारियों के अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार से शहर की व्यवस्थाएं चरमराने लगी हैं। शुक्रवार सुबह 10 बजे से तमाम कर्मचारियों ने अपने काम से दूरी बना ली और गाड़ी खाना परिसर में एकत्र होकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस आंदोलन का मुख्य कारण सफाई कार्य का ठेका दिए जाने का विरोध करना है।

सड़कों और दुकानों के बाहर लगा कचरा, कारोबारियों में आक्रोश

हड़ताल का असर सुबह से ही शहर की सड़कों पर दिखने लगा। बाजारों और दुकानों के सामने कचरे के ढेर जमा हो गए, जिससे स्थानीय व्यापारियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। सुबह करीब 11 बजे जब व्यापारी गोलू सोनी अपनी दुकान खोलने पहुंचे, तो उन्होंने दुकान के बाहर गंदगी का अंबार पाया। मजबूरन उन्हें खुद आसपास सफाई करनी पड़ी। व्यापारियों ने रोष जताते हुए कहा कि वे सुबह दुकान पर पूजा-पाठ करते हैं, ऐसे में गंदगी होने से उन्हें परेशानी होती है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है।

रोजी-रोटी छिनने का डर और पुरानी नियुक्तियों की मांग

धरना दे रहे कर्मचारियों ने आशंका जताई है कि नगर पालिका सफाई व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। उनका कहना है कि यदि ठेकेदारी प्रथा लागू हुई, तो उनके परिवारों की आजीविका पर संकट आ जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वर्ष 1986 के बाद से सफाई पदों पर कोई नियमित भर्ती नहीं की गई है। कई कर्मी 1993, 1998 और 2008 से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें आज तक विनियमित नहीं किया गया है। कुछ चुनिंदा पुराने कर्मियों को तो लाभ मिला, बाकी वर्षों से वंचित हैं। इनमें से कई कर्मचारी 15 से लेकर 35 साल तक का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं।

पदोन्नति और पीएफ से जुड़ी समस्याएं भी उठाईं

कर्मचारियों ने अपनी अन्य समस्याओं का जिक्र करते हुए बताया कि नगर पालिका में लगभग 35-36 मेट और 40-45 ड्राइवर कार्यरत हैं। इनमें से कई ऐसे हैं जो पिछले 5 से 15 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा, कर्मियों ने गंभीर आरोप लगाया कि उनका पिछले दो साल से भविष्य निधि (पीएफ) का पैसा भी जमा नहीं किया गया है। मेटों से जन्म-मृत्यु जैसे कार्यों में हस्ताक्षर कराए जाते हैं, लेकिन उनकी अन्य समस्याओं की अनदेखी हो रही है।

अचानक हुई इस हड़ताल के चलते नगर पालिका प्रशासन के सामने एक तरफ कर्मचारियों की जायज मांगों का निराकरण करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर शहर में फैल रही गंदगी के बीच सफाई व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने की बड़ी जिम्मेदारी आन पड़ी है।