रेलवे स्टेशन से पीतांबरा पीठ तक निकला स्वागत जुलूस

दतिया में भाजपा के हाल ही में नियुक्त किए गए जिलाध्यक्ष माधवेंद्र सिंह परिहार का स्वागत कार्यक्रम गुरुवार को आयोजित किया गया। इस दौरान शहर के रेलवे स्टेशन से एक स्वागत जुलूस निकाला गया जो आगे बढ़कर पीतांबरा पीठ तक पहुंचा। इस पूरे घटनाक्रम और जुलूस के दौरान पार्टी के भीतर मौजूद गुटबाजी और सियासी दूरियां साफ तौर पर चर्चा का केंद्र बनी रहीं।

मंच पर नरोत्तम मिश्रा और आशुतोष तिवारी के बीच रही दूरी

स्थानीय भाजपा कार्यालय में आयोजित मुख्य कार्यक्रम के दौरान मंच पर पार्टी के कई दिग्गज नेता मौजूद थे। इनमें पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, आशुतोष तिवारी और सेवड़ा विधायक प्रदीप अग्रवाल शामिल रहे। हालांकि, जब नेता मंच पर बैठे तो नरोत्तम मिश्रा और आशुतोष तिवारी के बीच एक कुर्सी का फासला साफ देखा गया। तकनीकी रूप से यह खाली कुर्सी सेवड़ा नगर परिषद अध्यक्ष के पति गोविंद सिंह नागिल के लिए रखी गई थी, लेकिन इन दोनों नेताओं के बीच की यह दूरी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई।

जिलाध्यक्ष का अनोखा अंदाज, कार्यकर्ताओं के साथ लगाई दौड़

कार्यक्रम के एक हिस्से के रूप में पीतांबरा मंदिर परिसर में नवनियुक्त जिलाध्यक्ष माधवेंद्र सिंह परिहार ने अचानक कार्यकर्ताओं के साथ दौड़ लगाना शुरू कर दिया। उन्होंने मजाकिया और सख्त लहजे में कहा कि जो कार्यकर्ता उनके साथ दौड़ेगा, केवल वही उनकी आगामी टीम और कार्यकारिणी में पदाधिकारी बन पाएगा, अन्यथा वे पीछे छूट जाएंगे। उनके इस तरह दौड़ने का वीडियो भी सामने आया है, जो क्षेत्र में तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है।

इसके बाद भाजपा कार्यालय में अपने औपचारिक संबोधन के दौरान परिहार ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने वर्ष 1995 में जिला प्रवक्ता के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी और साल 1998 में युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली थी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी में व्यक्ति पूजा या परिक्रमा करने की कोई आवश्यकता नहीं है, बल्कि काम और अनुशासन सर्वोपरि होना चाहिए।

परिहार ने कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा कि राजनीति की राह में कई लोग अपने मार्ग से फिसल जाते हैं, लेकिन मूल्य आधारित राजनीति से कभी नहीं भटकना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी से अच्छे संबंध बनाए रखें और अधिकारियों से बातचीत के दौरान शालीनता व अनुशासन का विशेष ध्यान रखें।

अपने चयन की प्रक्रिया के बारे में बात करते हुए जिलाध्यक्ष ने खुलासा किया कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष का फोन रात में आया था और अगले ही दिन उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि उन्हें खुद भी अंतिम समय तक यह अंदाजा नहीं था कि उन्हें इस पद की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इससे यह साबित होता है कि भाजपा संगठन एक सामान्य कार्यकर्ता के आचरण और उसके काम का लगातार आकलन करता रहता है।