दतिया में 23 अगस्त 2010 से पहले सेवा में आए शिक्षकों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। आजाद अध्यापक शिक्षक संघ और अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले शिक्षकों ने रविवार को एक दिवसीय भूख हड़ताल का आयोजन किया।

टीईटी अनिवार्यता समाप्त करने की प्रमुख मांग

संगठन के जिलाध्यक्ष साबर सिंह दांगी के नेतृत्व में शिक्षकों ने इस बात पर जोर दिया कि 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की शर्त नहीं थोपी जानी चाहिए। शिक्षकों की मांग है कि इस संबंध में विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाए ताकि आरटीई एक्ट-2009 में आवश्यक संशोधन किया जा सके।

सेवा अवधि की गणना और पेंशन लाभ का मुद्दा

प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने मांग उठाई कि उनकी सेवा अवधि की गणना उनकी पहली नियुक्ति के वर्ष यानी 1998, 1999, 2001, 2003 और 2005 से की जाए। इसी आधार पर उन्हें पुरानी पेंशन, ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण का लाभ दिया जाना चाहिए।

अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर भी जताई नाराजगी

शिक्षकों ने विद्यालयों में लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से बंद करने की मांग की। इसके साथ ही पिछली हड़ताल के दौरान काटे गए या लंबित रहे वेतन के भुगतान की भी पुरजोर मांग उठाई गई।

दिनभर चले इस प्रदर्शन के अंत में शिक्षकों ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिला पंचायत दतिया के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को सौंपा। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी इन जायज मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।