प्रशासन और पुलिस की संयुक्त दबिश

दतिया जिले के सेंवढ़ा मार्ग पर स्थित ग्राम लक्ष्मणपुरा में बाहरी और मानसिक रूप से कमजोर व्यक्तियों से जबरन काम कराए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। इस बात की पुख्ता शिकायत मिलने के बाद राजस्व विभाग, श्रम विभाग तथा इंदरगढ़, थरेट और लांच थानों की पुलिस ने एक विशेष संयुक्त दल बनाकर बुधवार की सुबह गांव में औचक कार्रवाई की।

इस छापेमारी के दौरान दबंगों के परिसरों से चार युवकों को छुड़ाया गया। प्रारंभिक तौर पर मुक्त कराए गए युवकों की पहचान अनुज मिश्रा, अनुज, पिंटू और एक अन्य व्यक्ति के रूप में हुई है, जो भैंसों के तबेलों और खेतों में चारा काटने का काम करने को मजबूर किए जा रहे थे।

डराए-सहमे मिले पीड़ित, बोल पाने में असमर्थ

मौके से छुड़ाए गए इन चारों युवकों के साथ इतनी मारपीट और प्रताड़ना की गई थी कि उनकी शारीरिक स्थिति काफी दयनीय हो चुकी थी। खौफ और मानसिक कमजोरी के कारण वे अपना पूरा नाम और पता तक ठीक से नहीं बता पा रहे थे। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार इन्हें बस स्टैंड या रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थलों से निशाना बनाकर यहां लाया गया था।

मानसिक रूप से कमजोर बाहरी लोगों से जबरन बंधुआ मजदूरी कराई जा रही थी। मुक्त कराए गए मजदूरों से पूछताछ की जा रही है और जिनके यहां ये काम करते मिले हैं, उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की जाएगी। - दीपक यादव, तहसीलदार

सामाजिक कार्यकर्ता की छह महीने की मेहनत लाई रंग

इस पूरे प्रकरण का खुलासा गुना निवासी सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद भार्गव की सतर्कता से हुआ। उन्होंने बताया कि वे पूरे प्रदेश में इस तरह बंधुआ बनाए गए लोगों को मुक्ति दिलाने का कार्य करते हैं। लक्ष्मणपुरा गांव में इस प्रकार के अवैध कृत्यों की सूचना मिलने पर उन्होंने पिछले छह महीनों से खुफिया तौर पर जानकारियां जुटानी शुरू की थीं।

सामाजिक कार्यकर्ता के अनुसार उन्हें अपनी छानबीन में लगभग 35 लोगों को इस तरह बंधुआ बनाए जाने की आशंका मिली थी। फिलहाल प्रशासन ने शुरुआती सुराग के आधार पर चार लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है और इस अवैध धंधे में लिप्त अन्य लोगों की धरपकड़ व जांच प्रक्रिया तेज कर दी गई है।