दतिया विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली एक याचिका पर ग्वालियर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जिसके बाद अदालत ने विधायक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

चुनावी हलफनामे में आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने का दावा

भाजपा नेता और अधिवक्ता दीपक बेलपत्री द्वारा यह याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि जुलाई 2026 में हुए उपचुनाव के दौरान दाखिल किए गए चुनावी हलफनामे में घनश्याम सिंह ने अपने पुराने आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं दी।

याचिकाकर्ता के अनुसार, साल 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में हुए विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम के दौरान एक एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में करीब 22 लोगों के नाम शामिल थे, जिनमें घनश्याम सिंह का नाम भी होने का दावा किया गया है।

वर्ष 2020 के मामले का भी किया गया है उल्लेख

दायर याचिका में केवल 1991 के मामलों का ही नहीं, बल्कि साल 2020 में दर्ज एक अन्य आपराधिक मामले का भी जिक्र किया गया है। आरोप है कि इस प्रकरण की जानकारी भी 2023 के विधानसभा चुनाव के समय दिए गए शपथ पत्र में नहीं दी गई थी।

हालांकि, उपचुनाव के दौरान विधायक ने अपने शपथ पत्र में दो अन्य लंबित आपराधिक मामलों का जिक्र किया था। अब मुख्य विवाद इस बात पर है कि जिन मामलों को छिपाने का आरोप लगाया गया है, उनका उल्लेख हलफनामे में करना कानूनी रूप से अनिवार्य था या नहीं।

जबलपुर से ग्वालियर ट्रांसफर हुई थी याचिका

यह पूरा मामला पहले जबलपुर हाईकोर्ट में विचाराधीन था, जिसे बाद में प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ग्वालियर हाईकोर्ट की बेंच में ट्रांसफर कर दिया गया। जस्टिस अमित सेठ की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह को नोटिस जारी किया है।

गौरतलब है कि घनश्याम सिंह ने उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष को 6,016 मतों के अंतर से पराजित कर यह सीट जीती थी। अदालत द्वारा नोटिस जारी किए जाने का यह अर्थ नहीं है कि आरोपों की पुष्टि हो गई है, और इस मामले में अंतिम निर्णय दस्तावेजों तथा दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर ही होगा।