अदालत के आदेश के बाद भी नहीं मिला वाहन

दतिया जिले के इंदरगढ़ थाने की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां एक जब्तशुदा मारुति वैन को अदालत के स्पष्ट सुपुर्दगी आदेश के बावजूद वाहन मालिक को नहीं सौंपा गया है। पीड़ित वाहन मालिक जितेंद्र तिवारी का दावा है कि जब वह न्यायिक आदेश लेकर थाने पहुंचा, तो उसे गाड़ी गायब होने की बात कहकर टरका दिया गया।

क्या है पूरा मामला और जब्त गाड़ी का इतिहास

वार्ड नंबर 8 इंदरगढ़ निवासी जितेंद्र तिवारी, पुत्र अशोक तिवारी के अनुसार, वर्ष 2022-23 के दौरान जौरनियां के पास अवैध शराब के परिवहन के मामले में पुलिस ने उनकी मारुति वैन (क्रमांक MP 07 T 1460) को अपने कब्जे में लिया था। यह मामला अदालत में विचाराधीन है और इस प्रकरण में आरोपी ड्राइवर को पहले ही जमानत मिल चुकी है।

मामલા आगे बढ़ने पर सेवढ़ा की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आरती रतोनिया ने गत 10 सितंबर को थाना प्रभारी को वाहन मालिक के पक्ष में सुपुर्दगी देने के निर्देश जारी किए थे। आदेश मिलने के अगले दिन यानी 11 सितंबर को जब जितेंद्र थाने पहुंचे, तो वहां तैनात प्रधान आरक्षक पुष्पराज सिंह ने उन्हें बताया कि उनकी गाड़ी गलती से कबाड़ में कट चुकी है।

कबाड़ी का दावा और मालिक पर दबाव के आरोप

इस मामले में स्थानीय स्तर पर एक कबाड़ी का बयान भी सामने आया है। सेवढ़ा रोड पर स्थित एक कबाड़ी ने जानकारी दी कि करीब तीन-चार महीने पहले इंदरगढ़ थाने से एक मारुति वैन 25 हजार रुपए में उसके पास आई थी। उसने बताया कि उस गाड़ी पर कोई नंबर प्लेट नहीं थी और उसे काटकर कबाड़ के रूप में बेच दिया गया है।

पीड़ित जितेंद्र का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसे राजीनामा कर मामले को रफा-दफा करने और इसके बदले पैसे लेने का दबाव बनाया। जब उसने वाहन वापस लेने की जिद की और पैसे लेने से इनकार कर दिया, तो उसके खिलाफ कथित तौर पर एससी/एसटी एक्ट और मारपीट का मामला दर्ज कर दिया गया। उसका यह भी कहना है कि शिकायत करने पर उसे और गंभीर मामलों में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं।

पुलिस प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

वाहन मालिक के इन गंभीर आरोपों के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। एएसपी मंजीत सिंह चावला ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि एसपी द्वारा पूरे मामले की जांच बड़ौनी के एसडीओपी विनायक शुक्ला को सौंप दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।