दतिया शहर में अवैध और ओवरलोड रेत के परिवहन पर रोक लगाने के प्रशासनिक दावे पूरी तरह से खोखले साबित हो रहे हैं। कलेक्टर द्वारा लागू की गई नो-एंट्री की समय-सीमा के बावजूद रेत माफिया बेखौफ होकर शहर के बीचों-बीच से भारी वाहन निकाल रहे हैं। इससे न केवल यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि आम राहगीरों की जान पर भी बन आई है।

सीसीटीवी फुटेज से खुली प्रशासनिक दावों की पोल

हाल ही में बिहारी जी मंदिर के सामने का एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसने सुरक्षा और निगरानी के दावों की पोल खोल दी है। इस वीडियो में बुधवार रात करीब 10:30 बजे, जब शहर में भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित था, एक ओवरलोड रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली बेहद तेज रफ्तार में मुख्य सड़क से गुजरती दिखाई दे रही है।

हैरान करने वाली बात यह है कि इस ट्रैक्टर-ट्रॉली के आगे और पीछे कुछ बाइक सवार चल रहे थे, जो इस अवैध परिवहन को एस्कॉर्ट कर रहे थे। माफिया का यह संगठित नेटवर्क पुलिस और प्रशासन को सीधे चुनौती देता नजर आ रहा है।

सड़क पर मची अफरा-तफरी, बाल-बाल बचे लोग

तंग सड़क पर बेकाबू रफ्तार से दौड़ते इस काफिले को देखकर सड़क पर चल रहे अन्य वाहन चालकों और राहगीरों में हड़कंप मच गया। हादसे से बचने के लिए दोपहिया वाहन चालकों को अपनी गाड़ियां सड़क किनारे रोकनी पड़ीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर ट्रैक्टर का संतुलन थोड़ा भी बिगड़ता, तो कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।

कागजों तक सीमित कलेक्टर के आदेश

शहर में लगातार बढ़ रहे हादसों और जाम की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर ने सुबह 8 बजे से रात 11 बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। इसके बावजूद, मैदानी स्तर पर पुलिस और खनिज विभाग की निष्क्रियता के कारण रेत माफिया के हौसले बुलंद हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि चेकिंग के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है, जिससे इस अवैध कारोबार पर लगाम नहीं लग पा रही है।