अपनी धार्मिक पहचान के कारण मिनी वृंदावन और छोटी काशी कहे जाने वाले दतिया शहर में राधाष्टमी का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यहां के प्रमुख मंदिरों में ब्रज की तर्ज पर जन्मोत्सव के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे पूरा इलाका भक्तिमय हो गया है।

बड़े गोविंद मंदिर में हुए अलग दर्शन

शहर के ऐतिहासिक ठाकुर श्री बड़े गोविंद मंदिर में राधाष्टमी के अवसर पर विशेष परंपरा निभाई जा रही है। आमतौर पर ठाकुरजी और श्रीजी यानी राधा रानी गर्भगृह में साथ रहते हैं, लेकिन इस पावन पर्व पर दोनों के स्थान अलग-अलग तय किए गए हैं। ठाकुर श्री बड़े गोविंदजी अपने मूल गर्भगृह में भक्तों को दर्शन दे रहे हैं, जबकि श्रीजी मंदिर के शयन कक्ष में विराजमान हैं।

मंदिर में शनिवार की सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रीजी का विशेष दुग्धाभिषेक किया गया। इसके साथ ही शाम को मंदिर परिसर में पंडित नीरज पाठक द्वारा संगीतमय भजन संध्या का आयोजन भी निर्धारित किया गया है।

निकाली गई भव्य चाप और गूंजे बधाई गीत

राधाष्टमी की पूर्व संध्या पर शुक्रवार की रात शहर में भव्य चाप यानी चल समारोह निकाला गया। श्री राधावल्लभ मंदिर से रात्रि करीब आठ बजे बाजे-गाजे के साथ इस चल समारोह की शुरुआत हुई, जो देर रात तक शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए गुजरी।

इस दौरान ढोल-ताशों की थाप और डीजे पर बज रहे ‘राधा रानी ने जन्म लियो है’ जैसे लोकप्रिय बधाई गीतों से पूरा शहर गूंज उठा। चल समारोह में शामिल श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर नाचते-झूमते नजर आए।

राधावल्लभ मंदिर में सजेगा दधिकांधौ

श्री राधावल्लभ मंदिर में शनिवार सुबह राधा रानी के जन्मोत्सव पर मुख्य जन्म आरती संपन्न हुई। इसके बाद दोपहर के समय मंदिर परिसर में पारंपरिक ‘दधिकांधौ’ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें दही और हल्दी मिश्रित प्रसाद का श्रद्धालुओं पर छिड़काव किया जाता है।

ब्रज मंडल की इस अनोखी परंपरा का हिस्सा बनने के लिए दतिया शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण अंचलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। इस दौरान मटकी फोड़ प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जा रहा है, जिससे उत्सव का उत्साह और बढ़ गया है।