अंचल में अब झमाझम और मूसलाधार बारिश का दौर थमने की कगार पर पहुंच गया है। मौसम विभाग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, राजस्थान की तरफ से मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसके चलते सप्ताहांत के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से इसके लौटने की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है।

ट्रफ लाइन गायब होने से थमी मानसूनी गतिविधियां

मौसम विज्ञानियों का कहना है कि मानसूनी गतिविधियों की रीढ़ मानी जाने वाली ट्रफ लाइन यानी मानसून द्रोणिका इस समय पूरी तरह से गायब हो चुकी है। इस रेखा के समाप्त होने के कारण अब प्रदेश में भारी बारिश कराने वाले प्रभावी और मजबूत मौसमी सिस्टम लंबे समय तक सक्रिय नहीं रह पा रहे हैं।

वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. गुरुदत्त मिश्रा ने स्पष्ट किया कि द्रोणिका वह काल्पनिक रेखा होती है जो मानसूनी हवाओं की दिशा और क्षेत्र तय करती है। इसके निष्क्रिय होने से बड़े सिस्टम कमजोर पड़ जाते हैं, हालांकि इसका आशय यह नहीं है कि वर्षा बिल्कुल बंद हो जाएगी।

तापमान में गिरावट और हल्की ठंडक का अहसास

भारी बारिश का दौर भले ही थम गया हो, लेकिन वायुमंडल में नमी बनी रहने के कारण आसमान में हल्के बादलों की आवाजाही अभी भी जारी है। तापमान के आंकड़ों पर नजर डालें तो शहर का अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.2 डिग्री कम है।

इसी तरह न्यूनतम तापमान भी नीचे गिरकर 23.9 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है, जो कि सामान्य से 0.8 डिग्री सेल्सियस कम है। रात के तापमान में आई इस मामूली गिरावट की वजह से अब मौसम में हल्की ठंडक महसूस होने लगी है।

आगे कैसा रहेगा दतिया और आसपास का मौसम

वर्तमान में बंगाल की खाड़ी में एक नया कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है, साथ ही ऊपरी वायुमंडल में चक्रवाती हवाओं का घेरा भी सक्रिय है। इन स्थानीय कारकों और नमी के प्रभाव से आने वाले कुछ दिनों तक गरज-चमक के साथ छिटपुट बूंदाबांदी का सिलसिला बना रह सकता है।

मौसम विभाग का अनुमान है कि इस महीने के अंतिम सप्ताह तक मानसून राजस्थान के रास्ते मध्य प्रदेश से भी पूरी तरह विदा हो जाएगा। फिलहाल ग्वालियर-चंबल अंचल में किसी भी बड़े पैमाने पर मूसलाधार बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।