शहर में लगे अलग-अलग होर्डिंग्स और बैनर

दतिया में भाजपा के नए जिलाध्यक्ष के रूप में माधवेंद्र सिंह परिहार की ताजपोशी के बाद उनके स्वागत के लिए शहर भर में व्यापक तैयारियां की गई थीं। परिहार के भोपाल से झांसी होते हुए सड़क मार्ग से दतिया पहुंचने पर शहर के प्रमुख मार्गों पर कई होर्डिंग्स और बैनर लगाए गए थे। रेलवे स्टेशन से लेकर राजगढ़ चौराहे तक स्वागत के लिए कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटाई गई थी।

रेलवे स्टेशन पर बंटे नजर आए कार्यकर्ताओं के दल

नया जिलाध्यक्ष जब दतिया पहुंचा, तो उनके स्वागत के लिए पार्टी के अलग-अलग धड़ों से जुड़े कार्यकर्ता रेलवे स्टेशन पर पहुंचे थे। स्वागत सत्कार की औपचारिकता के बाद एक गुट नवनियुक्त जिलाध्यक्ष माधवेंद्र सिंह परिहार को अपने साथ ले गया। वहीं, दूसरी ओर पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थक स्टेशन पर ही मौजूद रहे क्योंकि मिश्रा पंजाब मेल ट्रेन से दतिया पहुंचे थे। यह ट्रेन अपने निर्धारित समय से करीब 1 घंटा 15 मिनट की देरी से शाम 4:15 बजे स्टेशन पर आई, जिसके बाद वे अपने समर्थकों के काफिले के साथ आगे के लिए रवाना हुए।

राजगढ़ चौराहे पर आमने-सामने आए काफिले

दौराननरोत्तम मिश्रा और नए जिलाध्यक्ष माधवेंद्र सिंह परिहार के काफिले राजगढ़ चौराहे पर एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए। इस मौके पर आशुतोष तिवारी भी नरोत्तम मिश्रा के काफिले के आसपास ही मौजूद दिखाई दिए। कुछ देर की स्थिति के बाद दोनों काफिले अलग-अलग दिशाओं में आगे बढ़ गए। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान दोनों पक्षों के नेताओं के बीच किसी तरह की औपचारिक बातचीत या संयुक्त स्वागत का कोई स्पष्ट नजारा देखने को नहीं मिला।

विधानसभा उपचुनाव के बाद से गहराए हैं मतभेद

स्थानीय भाजपा संगठन के भीतर चल रही इस धड़ल्ले और मतभेद की चर्चाओं की शुरुआत हालिया विधानसभा उपचुनाव के दौरान हुई थी। पार्टी ने 10 जुलाई को नरोत्तम मिश्रा के स्थान पर आशुतोष तिवारी को दतिया से चुनावी मैदान में उतारा था। इस फैसले के तुरंत बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने टिकट वितरण का विरोध किया था और उस दौरान तत्कालीन जिलाध्यक्ष समेत कई प्रमुख पदाधिकारियों के इस्तीफे देने की खबरें भी सामने आई थीं।

उपचुनाव के अंतर्गत 30 जुलाई को मतदान संपन्न हुआ था और 3 अगस्त को नतीजे घोषित किए गए थे, जिसमें आशुतोष तिवारी को हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी के भीतर कथित भीतरघात को लेकर भी जमकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला था। इसके बाद सांगतिक फेरबदल के तहत 22 सितंबर को माधवेंद्र सिंह परिहार को दतिया का नया जिलाध्यक्ष घोषित किया गया। स्वागत समारोह के दौरान स्थानीय नेताओं और उनके समर्थकों की यह अलग-अलग मौजूदगी अब राजनीतिक गलियारों में खास चर्चा का विषय बन गई है।