हत्या के मामले में निर्दोषों को फंसाने का आरोप

ग्राम गढ़ी में लाठियों से पीटकर मानसिंह रावत की हत्या किए जाने के प्रकरण में आरोपी पक्ष के लोग गुरुवार को बड़ी संख्या में एसपी ऑफिस पहुंचे। इस दौरान परिवार की महिलाएं, रिश्तेदार और स्कूली ड्रेस पहने हुए छोटे-छोटे बच्चे भी साथ नजर आए। सभी ने पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल को एक लिखित आवेदन सौंपा।

मोबाइल लोकेशन से जांच कराने की मांग

आवेदन देने पहुंची रामबाई पत्नी राजेंद्र सिंह रावत ने बताया कि उनके परिवार के छह सदस्यों के नाम हत्या के इस मामले में गलत तरीके से जोड़े गए हैं। गोराघाट थाने में दर्ज प्रकरण में उनके पुत्र उदयभान, वीर सिंह, विक्रम उर्फ भटुल्ली, पति राजेंद्र सिंह, भतीजे राहुल और देवर लोकपाल उर्फ बल्लू रावत को आरोपी बनाया गया है। परिवार का दावा है कि घटना के वक्त ये सभी लोग अपने घरों पर थे और इस बात की पुष्टि मोबाइल लोकेशन की तकनीकी जांच से की जा सकती है।

फरियादी पर लगाए मनगढ़ंत आरोप लगाने के गंभीर इल्जाम

परिजनों का आरोप है कि फरियादी दीपक ने झूठी शिकायत के आधार पर यह केस दर्ज कराया है और एफआईआर में पूरी तरह से मनगढ़ंत कहानी गढ़ी गई है। उनका कहना है कि जिस जगह की घटना बताई जा रही है, उसके आसपास ही कल्लू कुशवाहा की झोपड़ी, आशाराम व हरनाम के मकान के अलावा अमान सिंह का खेत भी स्थित है और वहां से लोगों का आना-जाना लगा रहता है। आसपास के इस इलाके में ऐसी कोई भी घटना नहीं हुई है।

आवेदन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह पूरी कार्रवाई पुरानी रंजिश के तहत झूठे तौर पर कराई गई है। जिन लोगों के नाम मुकदमे में दर्ज किए गए हैं, उनमें से कुछ लोग घटना के समय अपने खेतों में फसलों पर दवा का छिड़काव कर रहे थे तो कुछ घर पर मौजूद थे। हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों के नाम एफआईआर में लिख दिए गए हैं, वे तो मृतक मान सिंह के शव के पोस्टमार्टम के दौरान जिला अस्पताल में ही मौजूद थे। परिजनों ने एसपी से इस पूरे मामले की गहराई से और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।