दतिया जिला अस्पताल की पुरानी मेटरनिटी विंग के बंद पड़े कमरों में गुरुवार की रात अचानक आग भड़क उठी। कमरों से उठते घने धुएं को देखकर अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए हड़कंप मच गया और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
दस साल से बंद पड़े थे कमरे
जानकारी के अनुसार, जिस पुरानी मेटरनिटी बिल्डिंग में यह हादसा हुआ, उसके कई कमरे पिछले करीब एक दशक से उपयोग में नहीं आ रहे थे। लगभग दस साल पहले यहां प्रसव सेवाएं संचालित होती थीं, जिन्हें बाद में अन्यत्र शिफ्ट कर दिया गया था। इन बंद कमरों में पुराने गद्दे और अन्य अनुपयोगी सामान डंप किया गया था।
फायर ब्रिगेड ने पाया आग पर काबू
अस्पताल के कर्मचारियों ने जब कमरों से धुआं निकलते देखा तो तुरंत सतर्कता दिखाते हुए इसकी सूचना दमकल विभाग को दी। एहतियात के तौर पर संबंधित हिस्से की बिजली आपूर्ति भी तुरंत ठप कर दी गई। दमकलकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर कड़ी मशक्कत के बाद आग को पूरी तरह बुझा लिया।
घटना की सूचना मिलते ही सिविल सर्जन डॉ. केसी राठौर और आरएमओ डॉ. डीएस तोमर समेत अन्य अस्पताल अधिकारी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने पूरे परिसर का मुआयना किया और स्थिति का जायजा लिया।
सुरक्षित रहीं अन्य इकाइयां और लैब
अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि आग केवल पुरानी मेटरनिटी के बंद कमरों तक ही सीमित रही। इस बिल्डिंग में संचालित हो रही लैब और डायलिसिस यूनिट तक आग की आंच नहीं पहुंच पाई, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
प्रारंभिक तौर पर इस दुर्घटना के पीछे शॉर्ट सर्किट होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अधिकारी वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए मामले की जांच कर रहे हैं। सिविल सर्जन डॉ. केसी राठौर ने बताया कि समय रहते आग पर नियंत्रण पा लिया गया और इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि या बड़े नुकसान की खबर नहीं है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!