अंचल के जिला मुख्यालय दतिया में इस बार मौसम में आया बदलाव अपने साथ एक खतरनाक और नए म्यूटेशन वाले वायरल संक्रमण को लेकर आया है। हालात यह हैं कि जिला अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेज तक की ओपीडी और आईसीयू में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है, और आम बुखार में दी जाने वाली पैरासीटामोल जैसी दवाएं इस नए वायरस के आगे पूरी तरह बेअसर साबित हो रही हैं।

एक साथ तीन मोर्चों पर हमला कर रहा यह नया वायरल

चिकित्सकीय विशेषज्ञों का कहना है कि यह संक्रमण अब किसी सामान्य मौसमी बुखार की श्रेणी में नहीं आता है। यह शरीर पर एक साथ तीन गंभीर मोर्चों पर प्रहार कर रहा है, जिससे मरीजों की हालत तेजी से बिगड़ रही है।

संक्रमण के कारण मरीजों के फेफड़ों में निमोनिया के लक्षण मिल रहे हैं। ओपीडी में आने वाले लोग सांस फूलने और सीने तथा पसलियों में दर्द की गंभीर शिकायत कर रहे हैं, जिनकी जांच में निमोनिया के पैच स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।

इसके अलावा, शरीर के भीतर पहुंचते ही यह वायरस रक्त की संरचना को प्रभावित कर रहा है। यह श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBC) के संतुलन को बिगाड़ने के साथ-साथ प्लेटलेट्स की संख्या में भी भारी गिरावट दर्ज करा रहा है।

दवाएं फेल, मरीजों को चढ़ाई जा रही ड्रिप

बीमारी की उग्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुंह से ली जाने वाली एंटीबायोटिक और सामान्य बुखार की गोलियां इस पर कोई असर नहीं दिखा पा रही हैं। मजबूरन डॉक्टरों को मरीजों को सीधे ड्रिप और हाई-डोज़ इंजेक्शन के सहारे रखना पड़ रहा है।

अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, बीते कुछ दिनों में हजारों की संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचे हैं। अकेले मेडिसिन विभाग में प्रतिदिन एक हजार से अधिक लोग आ रहे हैं, जिनमें से अस्सी प्रतिशत से ज्यादा इसी नए और आक्रामक वायरल की गिरफ्त में हैं।

स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण और डॉक्टरों की चेतावनी

चिकित्सकों का मानना है कि इन मरीजों में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू जैसे गंभीर लक्षण देखे जा रहे हैं। हालांकि, स्थानीय स्तर पर एडवांस वायरल जीनोम टेस्टिंग की सुविधा न होने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि यह कौन सा सटीक स्ट्रेन है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी व्यक्ति को सिरदर्द, पसलियों में जकड़न, सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी या उल्टी जैसे संकेत मिलें, तो बिना देर किए चिकित्सकीय सलाह लें और लापरवाही बिल्कुल न बरतें।