दतिया जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से गुजरने वाली सिंध नदी का जलस्तर इन दिनों तेजी से बढ़ रहा है, जिससे इलाके में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। विभिन्न जल स्रोतों से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण नदी उफान पर है।

बांधों से बढ़ाया गया पानी का डिस्चार्ज

मोहनी सागर, हरसी बांध और समोहा डैम से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में बढ़ोतरी कर दी गई है। शुरुआती दौर में इन बांधों से 1215 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा था, जिसे बढ़ाकर रात के समय 1372 क्यूमेक्स कर दिया गया। इसके चलते सिंध नदी का जलस्तर सीधे खतरे के निशान के पास पहुंच गया है।

सनकुआं का छोटा पुल डूबा और गांवों में मुनादी

सेंवढ़ा के सनकुआं क्षेत्र में स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब वहां बना छोटा पुल पानी में डूब गया। इसके साथ ही सनकुआं के घाट भी जलमग्न हो गए। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए स्थानीय प्रशासन ने नदी के आसपास के गांवों में मुनादी करवाकर लोगों को सतर्क करना शुरू कर दिया।

एसडीएम अशोक अवस्थी और तहसीलदार दीपक यादव के निर्देशों के आधार पर राजस्व विभाग की टीम ने जरा, विजोरा, कंदरपुरा, ढिमरपुरा, मदनपुरा, महरौली, विडोरा और भोबई बुजुर्ग सहित कई गांवों में जाकर मुनादी कराई। इसके अलावा अतरेंटा, बुढ़ेरा, टोड़ा पहाड़, बेरछा, रूहेरा, खमरोली, पाली, सुनारी, लांच, कंजौली, पचेरा बुजुर्ग, खेरोना घाट, अंडोरा, बिलासपुर और कुलैंथ के निवासियों को भी एहतियात बरतने की सलाह दी गई है।

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मुस्तैद

प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले किसानों और पशुपालकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है। लोगों से लगातार यह अपील की जा रही है कि वे किसी भी सूरत में नदी या घाटों के नजदीक न जाएं तथा अपने बच्चों व मवेशियों को भी दूर रखें।

संभावित आपदा से निपटने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को पूरी तरह से अलर्ट पर रखा गया है। स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अमला बांधों से छोड़े जा रहे पानी के प्रवाह और नदी के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।