दतिया में शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि पर सोमवार को मां पीतांबरा मंदिर परिसर स्थित प्राचीन यज्ञशाला में विशेष सामूहिक हवन संपन्न हुआ। पिछले नौ दिनों से कठिन साधना और व्रत में लीन रहे दीक्षित श्रद्धालुओं ने सुबह के वक्त वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्निहोत्र में आहुतियां देकर अपना अनुष्ठान पूर्ण किया।

भोर से ही यज्ञशाला में जुटने लगे थे साधक

नवमी के दिन सुबह पांच बजे से ही साधकों का यज्ञशाला में आना शुरू हो गया था। जैसे-जैसे सूर्योदय हुआ, वैसे-वैसे वहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती चली गई। सभी साधक पारंपरिक वेशभूषा में निर्धारित हवन कुंडों के सामने अनुशासित तरीके से पंक्तिबद्ध होकर बैठे और पूरी तन्मयता के साथ विधि-विधान से पूजन किया।

इस दौरान गूंज रहे वैदिक मंत्रों के बीच श्रद्धालुओं ने अग्नि में आहुतियां अर्पित कीं। साधकों ने इस अनुष्ठान के जरिए व्यक्तिगत साधना के साथ-साथ संपूर्ण विश्व के कल्याण, शांति और समृद्धि की कामना की।

नौ दिनों की कठोर तपस्या का हुआ समापन

नवरात्रि के संपूर्ण नौ दिनों के दौरान इन साधकों ने कड़े नियमों और संयम का पालन करते हुए विशेष तपस्या और उपासना की थी। नवमी पर आयोजित इस सामूहिक हवन में पूर्णाहुति देकर उन्होंने अपनी इस साधना को विराम दिया और मां पीतांबरा के चरणों में अपनी हाजिरी लगाकर आभार व्यक्त किया। मंदिर में नवमी का यह सामूहिक हवन हर साल प्रमुख आयोजनों में शुमार रहता है।

कूपन के जरिए उपलब्ध कराई गई हवन सामग्री

मंदिर प्रबंधन समिति से मिली जानकारी के अनुसार, दीक्षित साधकों की यह साधना और नवमी का सामूहिक हवन पीठ की प्राचीन परंपरा का एक अहम हिस्सा है। हवन के लिए मंदिर प्रशासन द्वारा कूपन के माध्यम से साधकों को सामग्री मुहैया कराई जाती है, जिससे यज्ञशाला में सामूहिक रूप से आहुतियां दी जाती हैं।

इस बार के अनुष्ठान के लिए लगभग 8,100 कूपन काटे गए थे। देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में साधक और श्रद्धालु मां पीतांबरा के दरबार में अपनी आस्था प्रकट करने के लिए नवरात्रि के दौरान दतिया पहुंचते हैं।