दतिया में जरूरतमंद दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली है। पुरानी कचहरी के नजदीक स्थित रतन वाटिका में भारत विकास परिषद शाखा की ओर से आयोजित दो दिवसीय निशुल्क कृत्रिम अंग वितरण शिविर का समापन रविवार को हो गया।

विभिन्न प्रकार की सुविधाओं के लिए हुए चिह्नांकन

इस दो दिवसीय आयोजन के दौरान जिले के विभिन्न ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में दिव्यांगजन पहुंचे। शिविर में कुल 75 दिव्यांगजनों का पंजीयन कर उन्हें कृत्रिम अंग प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त, यात्रा और अन्य दैनिक कार्यों को सुगम बनाने के लिए 18 लोगों को बस पास और 8 लोगों को रेलवे पास के लिए चिन्हित किया गया।

सुलभ आवागमन और दस्तावेजों से जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा करते हुए 11 दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण तथा 5 लोगों को दिव्यांग प्रमाण-पत्र के लिए चिन्हित किया गया, ताकि वे सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से उठा सकें।

कलेक्टर और एसपी ने बढ़ाया हौसला

शिविर के समापन समारोह में जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल ने विशिष्ट अतिथि की भूमिका निभाई। अतिथियों ने शिविर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और लाभान्वित हुए लोगों का हौसला बढ़ाया।

इस दौरान भारत विकास परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष अमित जैन, शाखा अध्यक्ष संजय नाहर और कार्यक्रम संयोजक बल्लभ अग्रवाल समेत तमाम पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि दिव्यांगजनों की सेवा करना केवल एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि उन्हें समाज में बराबरी का हक और सम्मान दिलाने का माध्यम है।

चेहरों पर लौटी मुस्कान और आत्मनिर्भरता की उम्मीद

आर्थिक तंगी के कारण कई परिवारों के लिए कृत्रिम अंग या महंगे सहायक उपकरण खरीदना संभव नहीं हो पाता है। ऐसे में यह निशुल्क शिविर ऐसे परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया। उपकरण मिलने के बाद दिव्यांगजनों और उनके परिजनों के चेहरों पर साफ उम्मीद और खुशी झलक रही थी।